कश्मीरी सेब उत्पादन संकट पर केंद्र की बड़ी तैयारी, क्लीन प्लांट से लेकर रोगमुक्त पौध का प्लान तैयार

कश्मीर के सेब उत्पादन पर जलवायु बदलाव के चलते बुरा असर पड़ा है. तय समय पर बर्फबारी न होना और कम होना बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है. जबकि, प्राकृतिक जल स्रोतों के घटते पानी ने भी उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 28 Apr, 2026 | 01:58 PM

जम्मू कश्मीर का सेब देश ही नहीं दुनियभर में खूब पसंद किया जाता है. इसके निर्यात और घरेलू बाजार में ऊंचा दाम मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है. हालांकि, बीते कुछ वर्षों से यहां सेब उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है. जिसकी क्लाइमेट चेंज के चलते मौसम में बदलाव के साथ ही बागों के पुराने होने और नई हाई डेंसिटी वाली पौध नहीं होना भी है. इस संकट को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने मोटी रकम खर्च कर क्लीन प्लांट बनाने की घोषणा की है.

पुराने बागों के संकट को दूर करेगी हाईडेंसिटी वाली नई पौध

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कृषि की दृष्टि से देखें तो मेरी चिंता यह है कि यहां सेब सहित बाकी फलों के कई बाग बहुत पुराने हो चुके हैं, जिससे उत्पादन भी पहले जैसा नहीं रहा. अब आवश्यकता है कि हाईडेंसिटी जैसी नई पद्धतियों से नए बाग लगाए जाएं, ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके.

सेब क्लीन सेंटर बनाने के लिए 100 करोड़ खर्च करेगा केंद्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कश्मीर के सेब उत्पादन को बढ़ाने और संकट को दूर करने के लिए इसी दिशा में कार्य करते हुए यहां एक क्लीन प्लांट सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, ताकि किसानों को अच्छी वैरायटी के रोगमुक्त पौधे मिल सकें. यह केंद्र 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यहां बनाया जाएगा.

सेब उत्पादन पर क्लाइमेट चेंज का बुरा असर

कश्मीर के सेब उत्पादन पर जलवायु बदलाव के चलते बुरा असर पड़ा है. तय समय पर बर्फबारी न होना और कम होना बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है. जबकि, प्राकृतिक जल स्रोतों के घटते पानी ने भी उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है. शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार सेब के पेड़ों को सर्दियों में एक तय समय तक ठंड चाहिए होती है, जिसे “चिलिंग आवर्स” कहा जाता है. यही ठंड बाद में एकसमान फूल और अच्छे फल बनने में मदद करती है. यह संतुलन बिगड़ता देखा जा रहा है.

बर्फबारी सिर्फ ठंड के लिए ही जरूरी नहीं होती, बल्कि यह प्राकृतिक जल भंडार का काम भी करती है. बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर जमीन में नमी बनाए रखती है और भूजल स्तर को भी मजबूत करती है. बर्फ कम गिरने से किसानों ने कहा कि  गर्मियों में मिट्टी में नमी की कमी देखी जा रही है. इसका असर फल के आकार, गुणवत्ता और मिठास तक पर पड़ सकता है.

क्लाइमेट कंडीशन दूर करेंगे वैज्ञानिक और कृषि रोडमैप बनेगा

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की एग्रो-क्लाइमैटिक परिस्थितियों का को देखते हुए यहां वैज्ञानिकों का दल भेजा जाएगा, जो राज्य सरकार के साथ समन्वय कर दौरा करेगा और कृषि का एक व्यापक रोड मैप तैयार करेगा.

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Published: 28 Apr, 2026 | 01:58 PM
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