Chilli Farming: जड़ सड़न से पर्ण रोग तक, ऐसे बचाएं हरी मिर्च की फसल और बढ़ाएं मुनाफा
हरी मिर्च की खेती मुनाफे वाली फसल है, लेकिन रोग प्रबंधन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. जड़ सड़न, उकठा और पत्तियों के रोग फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. समय पर बीज उपचार, दवा का छिड़काव और सहफसल अपनाकर किसान अपनी फसल सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन पा सकते हैं.
Chilli Farming: हरी मिर्च ऐसी फसल है जो कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा दे सकती है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए किसान इसे फायदे की खेती मानते हैं. लेकिन अगर रोग प्रबंधन पर ध्यान न दिया जाए, तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. कई बार पौधे अच्छे बढ़ते हैं, लेकिन अचानक बीमारी लगने से खेत खाली जैसा दिखने लगता है. इसलिए शुरुआत से ही सावधानी जरूरी है.
जड़ सड़न और उकठा रोग से रहें सावधान
हरी मिर्च में जड़ सड़न एक बड़ी समस्या है. यह रोग आमतौर पर रोपाई के करीब एक महीने बाद दिखाई देता है. पौधे अचानक मुरझाकर गिरने लगते हैं. जड़ों में सड़न आ जाती है और पौधा सूख जाता है. इससे बचने के लिए खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. जरूरत पड़ने पर कार्बेंडाजिम का सही मात्रा में उपयोग फायदेमंद रहता है. उकठा रोग भी खतरनाक माना जाता है. यह बैक्टीरिया और फफूंद के कारण फैलता है और धीरे-धीरे पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. इस रोग से बचाव के लिए रोपाई से पहले बीज का उपचार करना जरूरी है. साथ ही नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभकारी माना जाता है.
पत्तियों का सिकुड़ना भी देता है खतरे का संकेत
अगर मिर्च की पत्तियां सिकुड़ने लगें या मुड़कर छोटी दिखने लगें, तो इसे हल्के में न लें. यह पर्ण कुंजन रोग का संकेत हो सकता है. इस बीमारी में पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फलन कम हो जाता है. ऐसे समय पर फफूंदनाशी या जरूरत के अनुसार कीटनाशी का इस्तेमाल करना चाहिए. खेत की नियमित निगरानी बहुत जरूरी है. अगर शुरुआत में ही बीमारी पकड़ में आ जाए, तो नुकसान कम किया जा सकता है. लापरवाही से बीमारी तेजी से फैलती है और पूरा खेत प्रभावित हो सकता है.
धनिया और मेथी बनेंगी प्राकृतिक सुरक्षा कवच
हरी मिर्च की फसल को सुरक्षित रखने के लिए सहफसल का तरीका भी अपनाया जा सकता है. मिर्च के साथ धनिया और मेथी की बुवाई करने से कई कीट और रोगों का असर कम हो जाता है. ये फसलें खेत में जैविक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं. सहफसल से एक और फायदा यह होता है कि किसान को अतिरिक्त आमदनी भी मिलती है. अगर किसी कारण मिर्च की फसल प्रभावित हो जाए, तो धनिया और मेथी से कुछ नुकसान की भरपाई हो सकती है.
हरी मिर्च की खेती में सफलता का राज सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि सही समय पर सही उपाय अपनाने में छिपा है. साफ-सफाई, जल निकासी, बीज उपचार और समय पर दवा का उपयोग-इन बातों का ध्यान रखकर किसान अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा पा सकते हैं. थोड़ी सी सतर्कता से बड़ी हानि से बचा जा सकता है.