Horticulture Scheme : अब खेतों में सिर्फ धान और गेहूं ही नहीं, बल्कि लहसुन और प्याज की खुशबू भी किसानों की मेहनत को नया मुकाम दे रही है. परंपरागत खेती से कम आमदनी झेल रहे किसानों के लिए अब एक नई उम्मीद सामने आई है. सरकारी बागवानी योजना के तहत मसाला फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है, जिससे गांवों में खेती का नजरिया बदलने लगा है.
धान-गेहूं से हटकर मसाला फसलों की ओर झुकाव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से किसान धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर रहे, लेकिन बढ़ती लागत और कम मुनाफे ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी थीं. इसी समस्या को देखते हुए उद्यान विभाग ने किसानों को लहसुन और प्याज की खेती के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया. ये फसलें कम समय में तैयार होती हैं और बाजार में इनकी मांग भी लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है.
खेती की लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को खेती की कुल लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. बीज, खाद और अन्य जरूरी संसाधनों में मिलने वाली इस मदद से किसानों का खर्च काफी कम हो गया है. सरकार का उद्देश्य यही है कि किसान बिना आर्थिक दबाव के नई फसलों की ओर कदम बढ़ा सकें और अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकें.
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उन्नत बीज और प्रशिक्षण से बढ़ा भरोसा
योजना से जुड़े किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उत्पादन बेहतर हो सके. इसके साथ ही खेती की सही तकनीक सिखाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है. इससे किसानों को बोआई से लेकर कटाई तक हर चरण में सही जानकारी मिल रही है. तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से फसल खराब होने का खतरा भी कम हुआ है.
आय बढ़ने से किसानों में उत्साह, योजना से जुड़ने की होड़
लहसुन और प्याज की खेती से कई किसानों को पहले ही अच्छी आमदनी मिलने लगी है. इससे गांवों में उत्साह का माहौल है और दूसरे किसान भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं. विभाग की ओर से समय पर तकनीकी सहायता दी जा रही है, जिससे उत्पादन लगातार बेहतर हो रहा है.
योजना का लाभ एक बार लेने के बाद कुछ समय के अंतराल पर दोबारा भी लिया जा सकता है, जिससे किसान लंबे समय तक इसका फायदा उठा सकते हैं. लहसुन और प्याज की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनती जा रही है. सही मार्गदर्शन, सरकारी मदद और मेहनत के दम पर अब किसान अपनी किस्मत खुद संवारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.