लहसुन बुवाई के हो गए हैं 80 दिन तो खेत में डालें ये खाद, बड़े-बड़े होंगे कंद.. पैदावार से भर जाएगा घर

लहसुन की फसल 120 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है. अमूमन किसान अक्टूबर से नवंबर के बीच लहसुन की बुवाई करते हैं. वहीं, मार्च से लहसुन की कटाई शुरू हो जाती है. अच्छी पैदावार के लिए लहसुन की सही देखभाल और खाद का सही इस्तेमाल जरूरी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Jan, 2026 | 02:25 PM

Garlic Farming: मार्च से लहसुन की नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी. इस बार किसानों की अच्छी पैदावार की उम्मीद है. बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब सहित पूरे देश में कई किसानों का कहना है कि उनके खेतों में लहसुन की उपज अच्छी नहीं होती है. इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन अब किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम एक ऐसे उर्वरक के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिससे अपनाते ही लहसुन के कंद के आकार बड़े-बड़े हो जाएंगे. इससे पैदावार में बढ़ोतरी होगी.

दरअसल, लहसुन की फसल 120 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है. अमूमन किसान अक्टूबर से नवंबर के बीच लहसुन की बुवाई करते हैं. वहीं, मार्च से लहसुन की कटाई शुरू हो जाती है. जिन किसानों ने अक्टूबर की आखरी हफ्ते और नवंबर की शुरुआती दिनों में लहसुन की बुवाई की थी, उनके पास अभी अच्छा मौका है. अगर ये किसान अपने खेत में कैल्शियम नाइट्रेट का इस्तेमाल करते हैं, तो लहसुन के कंद का साइज तेजी से बड़ा और वजनदार होगा. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि लहसुन की खेती में कैल्शियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कंद बनने के समय करना सबसे सही रहता है. यह समय बुवाई के लगभग 75-80 दिन बाद आता है. 90 दिन के बाद खाद देने से ज्यादा फायदा नहीं मिलता. इसलिए किसानों को समय पर ही खाद का प्रयोग करना चाहिए.

अच्छी पैदावार के लिए लहसुन की सही देखभाल जरूरी

दरअसल, लहसुन एक कंद वाली फसल है. अच्छी पैदावार के लिए लहसुन की सही देखभाल और खाद का सही इस्तेमाल जरूरी है. कैल्शियम नाइट्रेट  के इस्तेमाल से कंद का आकार और वजन दोनों तेजी से बढ़ता है. ऐसे भी कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लहसुन की फसल में कैल्शियम नाइट्रेट इस्तेमाल करने से किसानों को बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिल सकता है.

लहसुन के लिए कैल्शियम नाइट्रेट सेकेंडरी पोषक तत्व

लहसुन की खेती में कैल्शियम नाइट्रेट एक अहम सेकेंडरी पोषक तत्व  माना जाता है. इसका उपयोग खासतौर पर कंद वाली फसलों में किया जाता है. बाजार में कैल्शियम नाइट्रेट कई रूपों में उपलब्ध है, जिनमें कुछ में बोरोन मिला होता है, जिसे बोरोनेट कैल्शियम नाइट्रेट कहा जाता है. जबकि कुछ में अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी शामिल होते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पौधों के पोषक तत्व तीन वर्गों में बांटे जाते हैं. प्राइमरी, सेकेंडरी और सूक्ष्म पोषक तत्व. इन सभी का संतुलित इस्तेमाल करने से लहसुन की फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है.

 

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Published: 28 Jan, 2026 | 02:23 PM

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