3 महीने में खेत से निकलेगा लाखों का मुनाफा! इस लाल सब्जी की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत
Beetroot Farming: चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बनती जा रही है. यह फसल 2-3 महीने में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी सालभर अच्छी मांग रहती है. एक एकड़ में करीब 15-20 हजार रुपये की लागत से 1 से 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा संभव है. हेल्थ और जूस इंडस्ट्री में बढ़ती मांग के कारण चुकंदर की खेती भविष्य में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.
Chukandar Ki Kheti: आज के समय में किसान तेजी से परंपरागत खेती से हटकर ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें मेहनत और खर्च कम हो, लेकिन आमदनी अच्छी मिले. ऐसी ही एक फसल है चुकंदर यानी बीटरूट, जो कम समय में तैयार होकर किसानों को शानदार मुनाफा दिला सकती है. चुकंदर की खेती खास तौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, जो कम समय में नकद कमाई चाहते हैं.
खर्च और कमाई का पूरा गणित
अगर कोई किसान 1 एकड़ जमीन में चुकंदर की खेती करता है, तो औसतन 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है. इसमें बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है. सही देखभाल और समय पर सिंचाई से एक एकड़ में 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है.
अगर बाजार भाव औसतन 20 रुपये प्रति किलो माना जाए, तो कुल बिक्री से 1.60 लाख से 2 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. खर्च निकालने के बाद किसान को 1 से 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है.
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कब और कैसे करें बुवाई
चुकंदर की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है. मैदानी इलाकों में इस समय बोई गई फसल से अच्छी पैदावार मिलती है. इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. खेत की अच्छी तरह जुताई कर सही दूरी पर बीज बोने से चुकंदर का आकार और वजन दोनों बेहतर होते हैं.
कितने दिन में तैयार होती है फसल
चुकंदर की फसल आमतौर पर 55 से 85 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. कुछ उन्नत किस्में तो 45 से 50 दिन में ही बाजार पहुंच जाती हैं. दिसंबर से फरवरी के बीच इसकी कीमत बाजार में अच्छी मिलती है.
सब्सिडी और सरकारी सहायता
हालांकि केंद्र सरकार चुकंदर की खेती पर सीधे कोई सब्सिडी नहीं देती, लेकिन कई राज्य सरकारें बीज और अन्य आदानों पर आर्थिक सहायता देती हैं. बिहार समेत कुछ राज्यों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के तहत इसका लाभ मिल सकता है. किसान अपने जिले के कृषि विभाग से जानकारी लेकर योजना का फायदा उठा सकते हैं.
क्यों फायदेमंद है चुकंदर की खेती
चुकंदर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 2 से 3 महीने में तैयार हो जाती है. इस फसल की खेती में ज्यादा खर्च नहीं आता और बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है. हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण जूस सेंटर, जिम, अस्पताल और हेल्थ इंडस्ट्री में बीटरूट की डिमांड लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि किसान इसे सुरक्षित और मुनाफे वाली फसल मान रहे हैं.
हेल्थ बेनिफिट्स के कारण बढ़ती मांग
एक्सपर्ट बताते हैं कि, चुकंदर को खून बढ़ाने वाली सब्जी माना जाता है. आयरन से भरपूर होने के कारण यह कमजोरी, एनीमिया और फिटनेस से जुड़े लोगों की पहली पसंद बन चुकी है. यही वजह है कि आने वाले समय में चुकंदर की खेती किसानों के लिए एक भरोसेमंद और मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है.