Drip Irrigation: करेले की खेती में अपनाएं ये खास विधि, पैदावार होगी दोगुनी और कमाई पहुंचेगी लाखों तक

सही समय पर बुवाई, उन्नत बीज और आधुनिक तकनीक अपनाकर करेले की खेती से बेहतर पैदावार ली जा सकती है. ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और बेल को सहारा देने से उत्पादन बढ़ता है. संतुलित खाद और नियमित देखभाल से फसल की गुणवत्ता सुधरती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं.

नोएडा | Updated On: 19 Feb, 2026 | 07:09 PM

Bitter Gourd Farming: करेला भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसकी खेती किसानों के लिए मीठा मुनाफा दे सकती है. सही समय पर बुवाई और थोड़ी सी आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं. खासकर फरवरी में बोई गई फसल को मौसम का पूरा साथ मिलता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और उत्पादन भी ज्यादा होता है.

सही समय पर बुवाई है सफलता की चाबी

करेले की खेती  में समय सबसे अहम है. अगर बुवाई सही मौसम में की जाए, तो पौधों की बढ़वार तेज होती है और रोगों का खतरा कम रहता है. फरवरी का महीना इसके लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय तापमान संतुलित रहता है. समय पर बोई गई फसल दो से तीन महीने में फल देना शुरू कर देती है. इससे किसान जल्दी बाजार में माल पहुंचा सकते हैं और अच्छे दाम पा सकते हैं.

उन्नत किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाएं

अच्छी पैदावार के लिए उन्नत बीज का चयन जरूरी है. अच्छी किस्म के बीज  से पौधे मजबूत बनते हैं और फल ज्यादा लगते हैं. अगर किसान ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करें तो पानी की बचत के साथ पौधों को बराबर नमी मिलती रहती है. साथ ही मल्चिंग करने से जमीन में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं. इन तरीकों से उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

बेल वाली फसल को दें सही सहारा

करेला बेल वाली फसल है, इसलिए इसे ऊपर चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है. बांस, तार या मजबूत धागे का सहारा देकर पौधों को ऊपर  की ओर बढ़ाया जा सकता है. जब बेल ऊपर चढ़ती है तो उसे भरपूर हवा और धूप मिलती है. इससे फल जमीन से नहीं सड़ते और साफ-सुथरे रहते हैं. साफ फल बाजार में ज्यादा पसंद किए जाते हैं, जिससे अच्छा भाव मिलता है.

खाद, सिंचाई और देखभाल का रखें ध्यान

बुवाई के बाद संतुलित मात्रा में खाद  देना जरूरी है. समय-समय पर टॉप ड्रेसिंग करने से पौधों की ग्रोथ तेज होती है. गुड़ाई करने से मिट्टी ढीली रहती है और जड़ों को ताकत मिलती है. सिंचाई भी जरूरत के हिसाब से करें. ज्यादा पानी देने से जड़ सड़ सकती है और कम पानी देने से पौधा सूख सकता है. सही देखभाल से पौधों में ज्यादा फूल आते हैं और फलन बेहतर होता है.

Published: 19 Feb, 2026 | 11:30 PM

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