मछली पालकों के लिए एडवाइजरी, शुरू करें बीज कलेक्शन.. जानें तालाब में चूना डालने की सही टाइमिंग

जैविक और रासायनिक उर्वरक एक्सपर्ट की सलाह के बिना तालाब में न डालें. पानी का रंग ज्यादा हरा होने पर उर्वरक और चूना बंद कर दें. तालाब की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोटेशियम परमैंगनेट 400 ग्राम या नमक 40-50 किलो प्रति एकड़ डालें.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 17 Feb, 2026 | 05:09 PM

Fish Farming: फरवरी महीने का पहला पखवाड़ा बीत चुका है. इसके साथ ही गर्मी के मौसम का आगमन हो गया है. सुबह- शाम हल्की सर्दी रहती है तो दोपर होते ही तेज धूप निकल जाती है. इससे तापमान में अचानक बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में बढ़ते तापमान का असर इंसान के साथ-साथ फसल और मवेशियों के ऊपर भी पड़ रहा है. लेकिन इस मौसम का सबसे ज्यादा असर मछलियों के ऊपर देखने को मिल रहा है. इसलिए फरवरी का महीना मछली पालकों के लिए बहुत ही महत्वूपर्ण हो गया है. अगर वे मछलियों की सही तरीके से देखरेख नहीं करते हैं, तो आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

कृषि जानकारों का कहना है कि मछली पालन  में अच्छी ग्रोथ और उत्पादन पाने के लिए मौसम के अनुसार मछलियों की देखभाल करना जरूरी है, नहीं तो नुकसान हो सकता है. मछली पालन में हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखना आवश्यक है. जैसे अब फरवरी महीने में जनवरी जैसी ठंड नहीं रही. इसलिए मछलियों की देखभाल का तरीका बदलना जरूरी हो गया है. एक्सपर्ट के अनुसार, फीडिंग से लेकर तालाब प्रबंधन तक बदलाव करना जरूरी है.

पंगेशियस मछली वाले तालाब में जाल नहीं चलाना चाहिए

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग  ने फरवरी  महीने में मछलियों की देखभाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है. विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस महीने क्या करना चाहिए और क्या नहीं. विभाग के मुताबिक, फरवरी महीने में मछली पालन के लिए कुछ खास कदम जरूरी हैं. मछली बीज उत्पादक कॉमन कार्प का उत्पादन हैचरी या तालाब में हॉपा विधि से शुरू करें. तालाब में हर 15 दिन बाद जाल चलाएं, लेकिन पंगेशियस मछली वाले तालाब में जाल नहीं चलाना चाहिए. पानी के बढ़ते तापमान के अनुसार स्पलीमेंट फीड का इस्तेमाल बढ़ाते रहें.

26 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर क्या करें

वहीं, जैविक और रासायनिक उर्वरक एक्सपर्ट की सलाह के बिना न डालें. पानी का रंग ज्यादा हरा होने पर उर्वरक और चूना बंद कर दें. तालाब की गुणवत्ता  बनाए रखने के लिए पोटेशियम परमैंगनेट 400 ग्राम या नमक 40-50 किलो प्रति एकड़ डालें. पानी का पीएच सुबह 5-6 बजे और दोपहर 2 बजे दो बार जांचें. सदाबहार तालाब में चूना 50 किलो प्रति एकड़ की दर से डालें और मत्स्य अंगुलिकाओं का ट्रांसफर नियमित करें. तालाब में जलीय पौधों की सफाई भी जरूरी है. वहीं, पानी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने पर मत्स्य बीज संचयन शुरू करें. इन सभी कदमों का पालन करने से मछली पालन में नुकसान कम होगा, मछलियों की ग्रोथ बढ़ेगी और मछली पालन से अच्छा मुनाफा होगा.

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Published: 17 Feb, 2026 | 04:05 PM

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