राजस्थान के बाड़मेर जिले में बीती शाम को 55 भेड़ों और बकरियों की पानी पीते ही मौत हो गई है. इसके बाद 192 भेड़ों की भी पानी पीते ही मौत हो गई है. दो दिन में 140 से ज्यादा पशुओं की मौत होने से हड़कंप मचा हुआ है. मामले में इलाके से गुजरी पाइपलाइन और टैंकर का पानी पीने से मौत होने की बात कही जा रही है. जिला प्रशासन ने पानी की जांच के निर्देश दिए हैं. वहीं, किसानों ने सरकार से नुकसान की भरपाई की मांग की है.
बाड़मेर जिले में एक किसान की 192 भेड़ें पानी पीते ही मरीं
बाड़मेर जिले के पोकरण, अजासर और दिधू गांवों में कई किसानों की भेड़-बकरियों की पानी पीने से मौत हो गई है. इसके बाद अब नाचना इलाके के तड़ाना गांव में पानी पीने के 15 मिनट बाद 192 भेड़ों की मौत हो गई है. एक ही पशुपालक की भेड़ें मरने से हड़कंप मच गया है. रिपोर्ट के अनुसार ताड़ाना निवासी गुलाबसिंह पुत्र दुर्गसिंह 200 भेड़ों को लेकर चराने निकले थे. दोपहर के समय जब उन्होंने भेड़ों को पानी पिलाया तो पानी पीते ही भेड़ों की स्थिति बिगड़ने लगी प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पानी गले से नीचे उतरते ही भेड़ें पागलों की तरह छटपटाने लगीं और देखते ही देखते मौके पर ही भेड़ों की मौत हो गई. पशुपाल गुलाबसिंह के पास कुल 200 भेड़ें थीं, जिनमें से 192 की मौत हो चुकी है.
पोकरण में 55 भेड़-बकिरयों और 2 बछड़ों की मौत हुई
इससे पहले पोकरण इलाके में भेड़ों की रहस्यमयी मौत का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा. दिन में 55 भेड़ों और दो बछड़ों की मौत से हड़कंप मच गया है. पशुओं की मौत का कारण पानी बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि पाइप लाइन के एयर वॉल्व में लीकेज होने से पानी लगातार बह रहा था, जिसे भेड़ों ने पी लिया. दिधू निवासी लालसिंह और सुमेरसिंह की भेड़ों की मौत हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी जहरीला है तो इसकी तुरंत जांच कराई जानी चाहिए, वहीं कुछ लोग किसी अन्य कारण की भी आशंका जता रहे हैं. फिलहाल पशुपालन विभाग प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.
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जिला प्रशासन ने पानी की जांच शुरू कराई
भेड़ों और अन्य पशुओं की मौत की सूचना पर प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है और डॉ. राजकुमार गुप्ता अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने मृत भेड़ों का निरीक्षण किया. स्वास्थ्य विभाग ने पानी के नमूने और मृत भेड़ों के विसरा सैंपल लेकर लैब भिजवाए हैं. हादसे का संदिग्ध पहलू वह पानी है जिसे भेड़ों ने पिया था. यह पानी दिधू गांव से एक ट्रैक्टर-टैंकर के जरिए लाया गया था. ग्रामीणों का दावा है कि पानी में जहरीला पदार्थ या केमिकल मिला हुआ था. आशंका जताई जा रही है कि जिस टैंकर से पानी लाया गया उसमें कुछ मिला हो सकता है.
बाड़मेर के कई हिस्सों में पानी दूषित हुआ
बाड़मेर के प्रगतिशील किसान और एफपीओ संचालक छगन लाल ने बताया कि इलाके का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है. यहां बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों से जहरीला कचरा फैल रहा है. वहीं, किसान भी फसलों में जमकर केमिकल और कीड़ा मारने वाली दवाएं इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका असर पशुओं पर दिखने लगा है. उन्होंने कहा कि भेड़ों और बकरियों के पानी पीकर मरने के मामले में जांच के बाद ही पता चलेगा कि पानी में क्या मिला था.
गांव-गांव आरओ लगाने की मांग
किसान छगन लाल ने कहा कि पानी के नमूनों की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि जहर के प्रकार का पता चल सके. पीड़ित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए. इसके साथ ही क्षेत्र के सभी जल स्रोतों और टैंकरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. उन्होंने कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार गांवों-गांवों में आरओ प्लांट लगवाया जाए और पशुओं का पेयजल संकट दूर करने की व्यवस्था भी की जाए.