सब्सिडी वाले कृषि-ग्रेड यूरिया का नहीं होगा औद्योगिक इस्तेमाल, कृषि विभाग ने सख्त की निगरानी

यमुनानगर जिले में प्लाईवुड उद्योगों में यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए कृषि विभाग ने विशेष निगरानी शुरू की. MFMB पोर्टल और IFMS के जरिए सब्सिडी वाले यूरिया का सही वितरण सुनिश्चित किया गया. किसान जागरूकता और निरीक्षण से अवैध बिक्री और पैनिक खरीद पर रोक लगी.

Kisan India
नोएडा | Published: 12 Jan, 2026 | 11:00 PM

हरियाणा के यमुनानगर जिले में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्लाईवुड और उससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों पर विशेष नजर रखी जा रही है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने विशेष निगरानी में रखा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला कृषि-ग्रेड यूरिया उद्योगों में गलत तरीके से इस्तेमाल न हो. सख्त निगरानी के चलते जिले की प्लाईवुड इकाइयों में अब औद्योगिक उपयोग के लिए निर्धारित टेक्निकल ग्रेड यूरिया (TGU) का इस्तेमाल बढ़ा है. अक्टूबर 2025 से अब तक यमुनानगर की औद्योगिक इकाइयों को लगभग 40 हजार बैग TGU की बिक्री दर्ज की गई है.

वर्ष 2025 में जिले में सब्सिडी वाले कृषि-ग्रेड यूरिया की खपत  में भी कमी देखी गई है. इसका कारण प्लाईवुड फैक्ट्रियों में यूरिया के दुरुपयोग पर की गई सख्त कार्रवाई और किसानों में फसलों में यूरिया की मात्रा कम करने को लेकर बढ़ी जागरूकता बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में दिसंबर 2025 तक जिले को करीब 1 लाख 75 हजार बैग कम सब्सिडी वाला कृषि-ग्रेड यूरिया मिला.

उर्वरकों की आवाजाही पर निगरानी

यमुनानगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डाबस ने कहा कि जिले में उर्वरकों की आवाजाही, भंडारण और अंतिम उपयोग पर जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार निगरानी की जा रही है. डॉ. डाबस ने कहा कि सब्सिडी वाले यूरिया  की प्राप्ति कम होने के बावजूद, ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल को इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के साथ जोड़ने से यूरिया का सही इस्तेमाल, उचित वितरण और असली किसानों के लिए लगातार उपलब्धता सुनिश्चित हुई.

उन्होंने कहा कि उर्वरक की रीयल-टाइम ट्रैकिंग, PoS-आधारित बिक्री और किसान सत्यापन ने समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद की और खेत स्तर पर कृत्रिम कमी को रोका. इसके अलावा, कृषि विभाग ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरीक्षण, अचानक छापेमारी और नियमों की जांच तेज कर दी है, ताकि कृषि-ग्रेड यूरिया के दुरुपयोग और अवैध वितरण को रोका जा सके.

इस साल अब तक 13 FIR दर्ज की गईं

जानकारी के अनुसार, इस साल अब तक 13 FIR दर्ज की गई हैं, 43 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए गए और लगभग 5,868 बैग कृषि-ग्रेड यूरिया जब्त किया गया. विभाग ने Essential Commodities Act, 1955 और Fertiliser (Control) Order, 1985 के तहत दोषी पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. डॉ. डाबस ने बताया कि तकनीक आधारित निगरानी और कड़े नियमों के साथ-साथ मैदानी स्तर पर प्रशासनिक और किसान जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए हैं, ताकि यूरिया का सही, जरूरत के अनुसार और कानूनी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके.

किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए

उन्होंने कहा कि गांव और ब्लॉक स्तर पर व्यापक किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किए गए, जिनमें यूरिया के अत्यधिक या असंतुलित इस्तेमाल के नुकसान जैसे मिट्टी की गिरावट और उर्वरक की प्रभावशीलता कम होने के बारे में किसानों को समझाया गया. किसानों को मिट्टी जांच आधारित पोषण प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक अनुशंसित मात्रा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया. खास ध्यान फसलों और उनकी वृद्धि के चरण के अनुसार यूरिया की वास्तविक आवश्यकता का आकलन करने पर रखा गया, विशेषकर गेहूं, गन्ना, चारागाह और सब्जियों के लिए. सब्सिडी वाले यूरिया का वितरण खेत के क्षेत्रफल, फसल की वृद्धि अवस्था और स्थल सत्यापन के आधार पर किया गया, जिससे पैनिक खरीद और अनावश्यक भंडारण रोका जा सका.

 

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Published: 12 Jan, 2026 | 11:00 PM

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