केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में “भारत-VISTAAR” का शुभारंभ किया और इसके साथ किसानों को एआई-आधारित डिजिटल सुरक्षा कवच सौंपा. इस दौरान किसानों के बीच कार्यक्रम में AI-भारती ने अद्भुत ढंग से दिए कृषि संबंधी सवालों के संतुष्टिजनक जवाब दिए. कृषि मंत्री ने कहा किभारत-VISTAAR के जरिए सवाल पूछो और सीधे जवाब मिलेगा. इसके लिए 155261 नंबर हर किसान को अपने पास रखना चाहिए. वहीं, उन्होंने अमेरिकी ट्रेड डील में किसानों का हित सुरक्षित रखने की बात कही तो दूसरी ओर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे राजनीतिक हमला किया.
स्वामीनाथन कमेटी, MSP और UPA का पुराना रिकॉर्ड
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसानों के बीच खड़े होकर पूछा कि राहुल गांधी यह बताएं कि जब स्वामीनाथन कमेटी ने लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी, तब कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर इसे मानने से इनकार क्यों किया. उन्होंने कहा कि जिस बात को कांग्रेस “बाज़ार विकृति” का नाम देकर ठुकराती रही, उसी को 2019 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के हित में धरातल पर उतारते हुए लागत पर 50% लाभ जोड़कर MSP तय करने का फैसला लागू किया.
अनाज, गरीब और फूड सिक्योरिटी पर कांग्रेस को घेरा, मोदी जी का राशन मॉडल आगे रखा
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय हजारों टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़ता रहा, सुप्रीम कोर्ट ने भी गरीबों को अनाज बांटने का सुझाव दिया, लेकिन सरकार ने इसे ठुकराते हुए अदालत को “सरकार के मामलों में दखल न देने” की नसीहत दे दी. इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 80 करोड़ देशवासियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराकर न सिर्फ गरीब और मजदूर वर्ग को सुरक्षा दे रहे हैं, बल्कि “अनाज की बरबादी” को “गरीब की थाली” में बदलने का काम कर रहे हैं.
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चीनी और खाद्य तेल नीति पर ‘किसके हित साधे गए, जवाब दें राहुल गांधी”
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 2009-10 के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय देश का गरीब नागरिक ₹20 किलो के हिसाब से आटा खरीदने को मजबूर था, लेकिन प्रतिबंध के बावजूद यही आटा ₹12.51 किलो की दर से बाहर निर्यात किया गया, जबकि घरेलू ज़रूरतें अधूरी थीं. इसी तरह चीनी नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन वाले वर्ष में कांग्रेस सरकार ने न तो बफर स्टॉक बनाया, न किसानों को गिरते दामों से बचाया और बाद में ₹36 किलो में चीनी आयात कर उसे ₹12.50 किलो में निर्यात करने जैसा “अर्थशास्त्रविहीन और संदेहास्पद फैसला” लिया, जिसका लाभ किसको मिला, इसका जवाब आज भी कांग्रेस के पास नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि खाद्य तेलों में 1993-94 तक भारत आत्मनिर्भर था, लेकिन तब कांग्रेस सरकार ने खाद्य तेलों को ओपन जनरल लाइसेंस में डालकर सस्ते आयात से देश की आत्मनिर्भरता खत्म कर दी और किसानों को विदेश आधारित आयात पर निर्भर बना दिया.
अमेरिका समझौता: किसान हित सर्वोपरि, झूठी अफवाहें बेअसर
अमेरिका के साथ हालिया समझौतों पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि वे किसानों के बीच भारत के कृषि मंत्री के रूप में “पूरी जिम्मेदारी” से कह रहे हैं कि किसी भी समझौते में भारतीय किसानों के हितों से समझौता नहीं किया गया. उन्होंने साफ कहा कि गेहूं, चावल, मक्का जैसी संवेदनशील फसलों पर दरवाज़ा बंद है, चावल उत्पादन में भारत आज दुनिया में नंबर-1 है और चीन से आगे निकल चुका है, ऐसे में किसानों को नुकसान पहुँचाने वाला कोई आयात स्वीकार ही नहीं किया गया.
सेब, दाल, सोयाबीन, मक्का और डेयरी पर स्पष्ट लाइन
सेब के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की जरूरत होती है, जो अभी तुर्किये और ईरान जैसे देशों से भी आता है. उन्होंने कहा कि यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से लिया जाए और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए, तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि “तुर्किये से लेने के बजाय कहीं और से लेने” का मामूली बदलाव मात्र है. सोयाबीन और मक्का पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पर कोई रियायत नहीं दी गई और यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में भी 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था, जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे. श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने साफ निर्देश दिया है कि दूध, घी, दही, पनीर सहित कोई भी डेयरी उत्पाद भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर आयात नहीं होने दिया जाएगा, ताकि देश के दूध उत्पादक किसानों को नुकसान न हो.
कपास, टेक्सटाइल और राजस्थान के मसालों पर “किसान-हित” का रोडमैप
कपास के मामले में मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है, जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बने और तैयार वस्त्रों का निर्यात बढ़े. उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा. उन्होंने साफ घोषणा की कि जीरा, मेथी, इसबगोल जैसी राजस्थान में पैदा होने वाली मसाला फसलों सहित भारतीय मसालों पर आयात की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि इन मसालों का निर्यात 0% ड्यूटी पर अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ाने की व्यवस्था की गई है, जिससे सीधे भारतीय किसानों को फायदा होगा.
मोदी जी देश को भी नहीं झुकने देंगे, किसान के हितों पर भी आंच नहीं आने देंगे
शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने दो वादे किए थे – “भारत को कभी झुकने नहीं दूंगा” और “किसानों के हितों को सर्वोपरि रखूंगा, उन पर आंच नहीं आने दूंगा” – और दोनों पर सरकार मजबूती से खड़ी है. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया गया, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा और हर वैश्विक समझौता “किसान-प्रथम दृष्टिकोण” से ही देखा जाएगा.
भारत-VISTAAR: पूछो और सीधे जवाब पाओ, 155261 नंबर हर किसान के लिए
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत-VISTAAR” को पूछो और सीधे जवाब पाओ” वाला प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि अब किसान बहनों-भाइयों को न दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे, न जटिल ऐप्लिकेशन से जूझना पड़ेगा, सिर्फ मोबाइल उठाकर 155261 नंबर डायल करना होगा. उन्होंने समझाया कि फसल में रोग लगे, बोनी का सही समय जानना हो, अगले दिन बारिश होगी या नहीं, या अलग-अलग मंडियों के भाव चाहिए हों – किसान सिर्फ फोन पर सवाल पूछेगा और तुरंत जवाब मिलेगा कि कौन-सी दवा डालें, कब बोनी करें व जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली या मुंबई की मंडियों में क्या भाव चल रहे हैं.
11 भाषाओं, योजनाओं और शिकायत निवारण तक पूरे एग्री सिस्टम को जोड़ने की घोषणा
श्री चौहान ने बताया कि भारत-VISTAAR अभी हिंदी और अंग्रेज़ी में शुरू हो रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से 11 भारतीय भाषाओं – जैसे गुजराती, तमिल, बंगला, असमिया, कन्नड़ आदि – में विस्तारित किया जाएगा, ताकि देश के हर प्रांत का किसान अपनी भाषा में सही सलाह ले सके. उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर पीएम-किसान, फसल बीमा, सॉइल हेल्थ कार्ड, संशोधित ब्याज अनुदान, कृषि यंत्रीकरण, पर ड्रॉप-मोर क्रॉप, पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, कृषि अवसंरचना कोष और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी, पात्रता, आवेदन की स्थिति और शिकायत निवारण तक की सुविधा उपलब्ध रहेगी और आगे “फार्मर आईडी” के जरिए खेत, मिट्टी और फसल से जुड़ा पूरा प्रोफाइल भी एक ही जगह पर जुड़ जाएगा.