बैंगन की खेती करने वाले किसान जान लें ये जरूरी उपाय, कीट और रोग नहीं करेंगे फसल खराब

बैंगन की खेती में अच्छी पैदावार के लिए शुरुआत से सही तैयारी और देखभाल जरूरी मानी जाती है. खेत की तैयारी, स्वस्थ पौध, संतुलित खाद और समय पर कीट-रोग नियंत्रण अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है. किसान आसान तरीकों से नुकसान घटाकर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी.

नोएडा | Updated On: 7 Feb, 2026 | 05:44 PM

Brinjal Farming:  बैंगन की खेती सब्जी उत्पादन का एक अहम हिस्सा मानी जाती है, लेकिन इसमें कीट और रोग सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं. कई बार मेहनत से तैयार फसल कुछ ही दिनों में खराब हो जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे यदि बैंगन की खेती में शुरुआत से ही सही तैयारी और समय पर देखभाल की जाए, तो इन समस्याओं से बचकर अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

अच्छी तैयारी से मिलती है मजबूत फसल

बैंगन की खेती  शुरू करने से पहले खेत की सही तैयारी बहुत जरूरी होती है. मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए कई बार जुताई करनी चाहिए, ताकि पौधों की जड़ें आसानी से फैल सकें. इसके साथ ही रोग-प्रतिरोधक और क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन करना चाहिए. सही किस्म चुनने से फसल में रोग लगने की संभावना कम होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है.

नर्सरी और रोपाई का सही तरीका

बैंगन की खेती में अच्छी पौध तैयार करना बहुत महत्वपूर्ण होता है. पौध क्यारी में या ट्रे में तैयार की जा सकती है. आजकल ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग भी बढ़ रहा है, क्योंकि इनमें उत्पादन ज्यादा मिलता है और तुड़ाई लंबे समय तक होती रहती है. लगभग 35-40 दिन की स्वस्थ पौध  होने पर खेत में रोपाई करनी चाहिए. पौधों के बीच सही दूरी रखना जरूरी होता है, ताकि उन्हें पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके. मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीक अपनाने से पानी की बचत होती है और खाद-दवा का उपयोग भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है.

रोगों से बचाव के आसान उपाय

बैंगन की फसल में विल्ट और मिल्ड्यू जैसे रोग अक्सर देखने को मिलते हैं. इनसे बचने के लिए जैविक खाद के साथ लाभकारी फफूंदनाशक मिलाकर खेत  में डालना फायदेमंद माना जाता है. जरूरत पड़ने पर समय-समय पर दवा का छिड़काव करने से रोग फैलने से रोका जा सकता है. नियमित निगरानी रखने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और पौधे स्वस्थ बने रहते हैं.

कीट नियंत्रण से बढ़ेगा उत्पादन

बैंगन की फसल में तना छेदक, फल छेदक, एफिड और सफेद मक्खी जैसे कीट नुकसान पहुंचाते हैं. फल छेदक सीधे फल को खराब कर देता है, जिससे बाजार में उसकी कीमत कम हो जाती है. ऐसे कीटों से बचाव के लिए समय पर दवा का छिड़काव और खेत की नियमित जांच जरूरी है. इससे पौधे सुरक्षित रहते हैं और उत्पादन पर असर नहीं पड़ता. संतुलित खाद, सही सिंचाई और समय पर देखभाल से किसान अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. कुल मिलाकर, बैंगन की खेती में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है सही योजना और समय पर प्रबंधन. अगर किसान खेत की तैयारी से लेकर कीट-रोग नियंत्रण तक सावधानी बरतें, तो फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है. वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बैंगन की खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.

Published: 7 Feb, 2026 | 10:30 PM

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