Methi Ki Kheti: खेत के कोने में उगाएं हरी मेथी, कम खर्च में खुलेगा अतिरिक्त कमाई का रास्ता
खेत के खाली हिस्से में हरी मेथी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का आसान तरीका बन रही है. कम लागत, कम पानी और जल्दी तैयार होने वाली यह फसल छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. बाजार में मांग रहने से बिक्री भी आसान रहती है.
Green Fenugreek Farming Tips: खेती में छोटे-छोटे प्रयोग कई बार बड़ी कमाई का रास्ता खोल देते हैं. अब कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ खेत के खाली हिस्सों का उपयोग कर हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. खासतौर पर हरी मेथी की खेती कम समय, कम लागत और आसान देखभाल के कारण किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा साधन बनती जा रही है. यह फसल कम मेहनत में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है.
कम जगह में शुरू हो जाती है खेती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरी मेथी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बड़े खेत की जरूरत नहीं होती. किसान अपने खेत के कोने, मेड़ या खाली पड़ी जमीन में भी इसकी बुवाई कर सकते हैं. इसका बीज सस्ता होता है और बुवाई की प्रक्रिया भी आसान होती है. लगभग 20 से 25 दिनों में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी नकद आमदनी मिल जाती है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह खेती खासतौर पर फायदेमंद मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जोखिम कम और फायदा जल्दी मिलता है.
कम पानी और जैविक खाद से अच्छी पैदावार
हरी मेथी की खेती में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती. कम पानी में भी यह फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है, जिससे पानी की बचत होती है. इसके लिए गोबर की खाद या जैविक खाद का उपयोग करने से भी अच्छी पैदावार मिलती है. इससे रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है. इस फसल में कीट और रोग भी कम लगते हैं, इसलिए दवाइयों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता. यही कारण है कि इसे कम लागत और कम जोखिम वाली खेती माना जा रहा है.
बाजार में बनी रहती है मांग
हरी मेथी एक ऐसी सब्जी है जिसकी मांग सालभर बनी रहती है. घरों, होटलों और सब्जी मंडियों में इसकी खपत लगातार रहती है. ताजी हरी मेथी जल्दी बिक जाती है, जिससे किसानों को भंडारण की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता. कई किसान इसे सीधे ग्राहकों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है और बेहतर दाम मिल जाता है. स्थिर कीमत और नियमित मांग के कारण यह खेती किसानों के लिए भरोसेमंद आय का साधन बन रही है..
सालभर कमाई का बन सकता है जरिया
विशेषज्ञों के अनुसार, हरी मेथी की खेती रबी और खरीफ दोनों मौसमों में की जा सकती है. इसका मतलब है कि किसान साल में कई बार इसकी फसल ले सकते हैं. इससे खेत की उपयोगिता बढ़ती है और नियमित आय का स्रोत बनता है. खेती में विविधता लाने और आय बढ़ाने के लिए यह एक आसान विकल्प माना जा रहा है. कम निवेश में शुरू होने वाली यह खेती किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मदद कर रही है. मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि अब कई किसान इस तरीके को अपनाकर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं और दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं.