Indigenous Cow Farming : ग्रामीण भारत में आज भी कई ऐसे किसान हैं जो कम पूंजी में ज्यादा कमाई का सपना देखते हैं. बढ़ती महंगाई, महंगे चारे और दवाइयों के बीच अगर कोई काम सबसे ज्यादा भरोसेमंद नजर आता है, तो वह है देहाती गायों का पालन. गिर, साहिवाल, हरियाणवी, थारपारकर और राठी जैसी देसी नस्लें न सिर्फ कम खर्च में पल जाती हैं, बल्कि परिवार की सेहत और खेती-दोनों का सहारा बनती हैं. यही वजह है कि आज फिर से किसान देहाती गायों की ओर लौट रहे हैं.
कम देखभाल, कम खर्च
देहाती गायों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इन्हें ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं होती. न तो महंगे शेड चाहिए और न ही बाहर से लाया गया भारी-भरकम चारा. गांवों में मिलने वाली हरी घास, भूसा और थोड़ा-सा दाना इनके लिए काफी होता है. ये गायें स्थानीय मौसम के हिसाब से ढली होती हैं, इसलिए बीमार भी कम पड़ती हैं. दवाइयों और डॉक्टर के खर्च में भी काफी बचत हो जाती है. यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी बिना ज्यादा जोखिम के इनका पालन कर पाते हैं.
दूध कम सही, लेकिन कमाई ज्यादा
कई लोग सोचते हैं कि देहाती गाय कम दूध देती हैं, इसलिए मुनाफा कम होगा. लेकिन हकीकत इससे अलग है. देसी गाय का दूध हल्का, पौष्टिक और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि इसका दाम बाजार में ज्यादा मिलता है. इस दूध से बना घी, दही और छाछ भी अच्छी कीमत पर बिकते हैं. शहरों में आज देसी गाय के दूध और घी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है.
- पशुपालकों के लिए रोजगार का नया मौका, केवल दूध ही नहीं ऊंट के आंसुओं से भी होगी कमाई
- बरसात में खतरनाक बीमारी का कहर, नहीं कराया टीकाकरण तो खत्म हो जाएगा सब
- पशुपालक इन दवाओं का ना करें इस्तेमाल, नहीं तो देना पड़ सकता है भारी जुर्माना
- 2000 रुपये किलो बिकती है यह मछली, तालाब में करें पालन और पाएं भारी लाभ
गोबर और मूत्र से भी कमाई
देहाती गाय सिर्फ दूध ही नहीं देती, बल्कि खेती के लिए भी खजाना है. इनके गोबर और मूत्र से जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक बनाए जाते हैं. इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है. कई किसान गोबर से बने कंडे, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल बेचकर भी अच्छी आमदनी कर रहे हैं. इस तरह एक ही गाय से कई तरह की कमाई के रास्ते खुल जाते हैं.
सेहत और खेती-दोनों को फायदा
देहाती गाय का पालन करने से सिर्फ आमदनी ही नहीं बढ़ती, बल्कि परिवार की सेहत भी सुधरती है. शुद्ध दूध और घी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद होता है. वहीं जैविक खेती अपनाने से जमीन की ताकत बनी रहती है और फसल की लागत घटती है. यही वजह है कि आज देसी गायों को ‘कम खर्च में जोरदार मुनाफा’ का सबसे भरोसेमंद साधन माना जा रहा है. ऐसे में अगर आप गांव में रहते हैं और टेंशन फ्री कमाई चाहते हैं, तो देहाती नस्ल की गायें आपके लिए एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती हैं.