Fake Seeds: साथी पोर्टल से किसानों को मिलेगा असली बीज का भरोसा, नकली बीज कारोबार पर लगेगी रोक

किसानों को सही और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने साथी पोर्टल लागू करने की तैयारी तेज कर दी है. इस डिजिटल प्रणाली से बीज उत्पादन, भंडारण और बिक्री की जानकारी एक जगह मिलेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का भरोसा मजबूत होगा. साथ ही नकली बीजों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

नोएडा | Published: 15 Feb, 2026 | 07:59 PM

Seed Portal: किसानों के लिए असली और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिलना खेती की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है. कई बार नकली या मिलावटी बीज के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार अब तकनीक का सहारा ले रही है. बीज की पूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराने के लिए साथी पोर्टल को लागू किया जा रहा है, जिससे बीज उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बन सके.

साथी पोर्टल से बीज वितरण होगा पारदर्शी

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय  द्वारा विकसित साथी (Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory) पोर्टल का मुख्य उद्देश्य किसानों को सही गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराना है. इस पोर्टल के जरिए बीज के उत्पादन, प्रमाणन और वितरण से जुड़ी हर जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होगी. सरकार ने बीज व्यवसायियों से अपील की है कि वे अप्रैल से पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी अपडेट करें. इससे बीज की सप्लाई चेन को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा और नकली बीजों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. किसान भी क्यूआर कोड स्कैन करके बीज की पूरी जानकारी देख सकेंगे.

प्रशिक्षण अभियान से जुड़े अधिकारी और विशेषज्ञ

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग  ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है. कृषि निदेशालय में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय टीम और महाराष्ट्र कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया. इस प्रशिक्षण में बीज प्रणाली से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझाया गया. साथ ही पोर्टल के इस्तेमाल, डेटा अपडेट करने और बीज ट्रैकिंग प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर के आईटी विशेषज्ञों ने पोर्टल के तकनीकी संचालन और उपयोग की प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया, ताकि सभी प्रतिनिधि इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें.

मास्टर ट्रेनर तैयार कर जिलों में दी जाएगी ट्रेनिंग

इस अभियान के तहत बीज उत्पादक  संस्थाओं, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है. हर जिले से तीन-तीन व्यवसायियों को प्रशिक्षण दिया गया है. अब ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में थोक और फुटकर बीज विक्रेताओं को प्रशिक्षण देंगे. इससे नई व्यवस्था को लागू करने में आसानी होगी. अधिकारियों के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत बीज विक्रेता पहले ही पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं. बाकी विक्रेताओं को भी जल्द पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है. अगर किसी विक्रेता या संस्था को पोर्टल से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो वे जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.

किसान क्यूआर कोड से जान सकेंगे बीज की पूरी जानकारी

साथी पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा सीधे किसानों को मिलेगा. बीज के पैकेट पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके किसान यह जान सकेंगे कि बीज कहां तैयार हुआ, किस संस्था ने उसे प्रमाणित किया और उसकी गुणवत्ता क्या है. इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और गलत बीज खरीदने का खतरा कम होगा. साथ ही बीज कंपनियों और विक्रेताओं की जवाबदेही भी तय होगी. सरकार का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू होने से बीज वितरण प्रणाली मजबूत होगी और खेती की गुणवत्ता में सुधार आएगा. आने वाले समय में यह व्यवस्था किसानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है.

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