फल पर बैठते ही अंदर से सड़ा देती है मक्खी, कद्दू-लौकी बचाने के लिए अपनाएं यह आसान देसी ट्रिक

Pumpkin Farming: कद्दू, लौकी और तोरई जैसी फसलों में फल मक्खी बड़ा नुकसान कर रही है. यह फल को अंदर से सड़ा देती है, जिससे पैदावार और दाम दोनों घटते हैं. अच्छी बात यह है कि मीठे आकर्षण चारे और ट्रैप की मदद से बिना ज्यादा स्प्रे के इस कीट को आसानी से रोका जा सकता है और फसल सुरक्षित रखी जा सकती है.

नोएडा | Updated On: 13 Apr, 2026 | 05:10 PM

Fruit Fly Control: कद्दू, लौकी, तोरई और खीरा जैसी बेल वाली सब्जियों में इन दिनों फल मक्खी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है. बाहर से बिल्कुल सही दिखने वाला फल कुछ ही दिनों में अंदर से गलने लगता है और मंडी में उसका दाम गिर जाता है. ऐसे में किसान अक्सर महंगे और तेज रसायनों का सहारा लेते हैं, लेकिन अब NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार एक आसान, सस्ता और सुरक्षित तरीका अपनाकर बिना ज्यादा स्प्रे के भी इस कीट को काफी हद तक रोका जा सकता है. फल मक्खी नियंत्रण के लिए मीठा आकर्षण चारा और ट्रैप तकनीक सबसे असरदार उपाय मानी जा रही है.

फूल आते ही शुरू हो जाता है नुकसान

फल मक्खी का हमला  तब सबसे ज्यादा होता है जब बेल वाली सब्जियों में फूल और छोटे फल आने लगते हैं. यह मक्खी फूल या नरम फल पर बैठकर उसमें छोटा सा छेद कर देती है और अंडे छोड़ देती है. कुछ ही समय बाद उसके लार्वा फल के अंदर बढ़ने लगते हैं और फल धीरे-धीरे सड़ने लगता है. बाहर से फल ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से वह खराब हो चुका होता है. यही वजह है कि किसान को नुकसान तब पता चलता है जब फल तोड़ने या बेचने का समय आता है. इससे उत्पादन भी घटता है और गुणवत्ता खराब होने से मंडी में भाव भी कम मिलते हैं. कद्दू, लौकी, करेला, खीरा और तोरई जैसी फसलें इस कीट से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.

बिना ज्यादा स्प्रे के तैयार करें आसान आकर्षण चारा

डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार फल मक्खी मीठी चीजों की तरफ जल्दी आकर्षित होती है. किसान इसी आदत का फायदा उठाकर इसे आसानी से फंसा सकते हैं. इसके लिए खेत में जगह-जगह पीले रंग  की पुरानी बोरी, प्लास्टिक शीट या कार्ड टांग दें. उस पर थोड़ा ग्रीस या चिपचिपा पदार्थ लगाएं और साथ में थोड़ा मीठा घोल जैसे गुड़ का पानी लगा दें. मक्खी पीले रंग और मिठास की तरफ खिंचकर उस पर बैठती है और चिपक जाती है. दूसरा आसान तरीका है छोटे बर्तन या बोतल में गुड़ की चाशनी, थोड़ा खमीर/हल्की अल्कोहल गंध वाला घोल और सुरक्षित कीट  आकर्षक द्रव्य भरकर खेत में लटकाना. मक्खियां इसकी खुशबू से खिंचकर उसी में फंस जाती हैं. इससे असली फल तक उनका पहुंचना कम हो जाता है.

बाजार वाले फ्रूट फ्लाई ट्रैप भी हैं फायदेमंद

अगर किसान घर पर चारा नहीं बनाना चाहते, तो बाजार में मिलने वाले रेडीमेड फ्रूट फ्लाई ट्रैप भी बहुत काम के हैं. ये ट्रैप लंबे समय तक चलते हैं और बार-बार स्प्रे करने की जरूरत भी कम कर देते हैं. खेत में एक निश्चित दूरी पर इन्हें लगाने से मक्खी की संख्या तेजी से घटती है. इससे फसल सुरक्षित रहती है और सब्जी की क्वालिटी अच्छी बनी रहती है. अच्छी क्वालिटी की सब्जी मंडी में ज्यादा दाम दिलाती है, इसलिए यह तरीका लागत घटाने के साथ कमाई बढ़ाने में भी मदद करता है. सबसे अच्छा समय यही है कि फूल आते ही ट्रैप लगाना शुरू कर दें, क्योंकि इसी समय मक्खी सबसे ज्यादा सक्रिय होती है.

समय पर नियंत्रण से फसल और कमाई दोनों बचेंगी

फल मक्खी छोटी जरूर है, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा करती है. अगर शुरुआत में ही ध्यान न दिया जाए तो पूरी बेल की फसल खराब हो सकती है. इसलिए जैसे ही फूल दिखने शुरू हों, खेत की निगरानी बढ़ा दें, खराब फलों को तुरंत हटाएं  और मीठे चारे या ट्रैप का इस्तेमाल शुरू कर दें. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार रसायनों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय आकर्षण चारा, ट्रैप और साफ-सफाई जैसे आसान उपाय ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ रहते हैं. अगर किसान सही समय पर यह तरीका अपनाते हैं, तो कद्दू-लौकी जैसी फसलों को गलने से बचाकर अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा आसानी से पा सकते हैं.

Published: 13 Apr, 2026 | 06:10 PM

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