पराली मामले में किसानों पर दर्ज FIR को वापस लेगी सरकार ? किसान नेता CM के सामने रखेंगे प्रस्ताव

कुरुक्षेत्र में पराली जलाने के 19 मामलों में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री करने की कार्रवाई शुरू हुई है. किसान नेताओं ने इसे अन्याय बताया है और सरकार से एफआईआर वापस लेने तथा सख्ती कम करने की मांग की है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 May, 2026 | 12:20 PM

Haryana News: फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के खिलाफ कुरुक्षेत्र जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. प्रशासन ने 19 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है. साथ ही इन किसानों के नाम ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री में डाल दिए गए हैं, जिसके कारण वे अगले दो साल तक मंडियों में अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे. वहीं, सरकार की इस कार्रवाई को किसान नेताओं ने आलोचना की है. किसान नेताओं का कहना है कि पूरे हरियाणा में इस तरह की कार्रवाई अन्नदातओं के साथ अन्याय है. साथ ही दर्ज FIR को वापस लेने की भी अपील की गई है.

एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने ‘किसान इंडिया’ से बातचीत में कहा कि अब पराली जलाने के मामले पहले से काफी कम हो गए हैं. किसानों में इसको लेकर जागरूकता बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान गलती से या अनजाने में पराली जलाते  हुए पकड़ा जाता है, तो सरकार को उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. किसानों पर एफआईआर दर्ज करना और उनका नाम रेड एंट्री में डालना गलत है. गुणी प्रकाश ने बताया कि उनका संगठन 13 मई के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करेगा. इस दौरान वे पराली जलाने के मामलों में नरमी बरतने और किसानों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग करेंगे.

पराली जलाने की कुल 49 घटनाएं सामने आईं

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में पराली जलाने की कुल 49 घटनाएं सामने आई थीं. इनमें से 20 जगहों पर आग लगने की पुष्टि नहीं हुई, जबकि एक स्थान पर कचरे में आग लगी मिली. नौ मामलों में किसानों ने खुद पुलिस और अधिकारियों को आग की सूचना दी और आग बुझाने की कोशिश भी की. वहीं 19 स्थानों पर जांच में साफ हुआ कि किसानों ने खुद पराली में आग लगाई थी. किसान अपने खेतों में आग लगाने का कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सके.

घटनाओं पर नियंत्रण के लिए ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन  अपनाने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने कई कार्यक्रम चलाए हैं. इसके तहत गांव स्तर पर समितियां बनाई गईं और किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. इन कार्यक्रमों में किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई. साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि फसल अवशेष जलाने पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है. अधिकारी ने बताया कि आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और उपमंडल स्तर पर विशेष टीमें भी बनाई गई हैं.

कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक

कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से खेतों का दौरा करने और हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए. उपायुक्त ने कहा कि किसानों को जागरूक करने और लगातार प्रयासों के बावजूद जिले में अब तक 19 पराली जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इन मामलों में संबंधित किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों में शिकायत भेजी गई है. साथ ही किसानों के नाम ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री  में दर्ज किए गए हैं, जिससे वे अगले दो साल तक अपनी फसल मंडियों में नहीं बेच सकेंगे.
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष को आग न लगाएं, वरना उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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Published: 8 May, 2026 | 12:15 PM
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