Budget 2026 से चीनी सेक्टर को उम्मीदें, ISMA ने वित्तमंत्री से चीनी का MSP बढ़ाने समेत कई मांगें कीं

Budget 2026: बजट 2026 से चीनी सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं. इंडस्ट्री ने कहा है कि अगर चीनी बिक्री मूल्य (MSP) में संशोधन किया जाता है, तो इससे गन्ना किसानों, मिल मालिकों और पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 21 Jan, 2026 | 03:47 PM

चीनी उद्योग और गन्ना किसानों की निगाहें बजट 2026 पर टिकी हुई हैं. लंबे समय से चीनी के मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP) में बढ़ोतरी न होने से मिलों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर गन्ना किसानों के भुगतान पर पड़ रहा है. उद्योग संगठनों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद MSP में संशोधन नहीं किया गया, जिससे मिलों पर दबाव बढ़ा है और किसानों का बकाया भुगतान अटक रहा है. ISMA के महानिदेशक ने कहा कि बिजली, मजदूरी, परिवहन और अन्य इनपुट लागत में लगातार इजाफा हुआ है, लेकिन चीनी का MSP वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है. इससे चीनी मिलों की आय और खर्च के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है.

चीनी उद्योग से जुड़े संगठन सरकार से MSP बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यदि सरकार MSP में संशोधन करती है तो इससे मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान संभव हो सकेगा. साथ ही इससे पूरे गन्ना आधारित क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.

गन्ना मूल्य बढ़ा पर चीनी का बिक्री मूल्य समान रहने से इंडस्ट्री पर दबाव

चीनी उद्योग बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है, क्योंकि बढ़ती इनपुट लागत और कमजोर नीतिगत समर्थन से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है. इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि शुगर इंडस्ट्री को सरकार से इस बजट में बहुत उम्मीद है. आपको पता है कि ये इंडस्ट्री लगभग 5.5 करोड़ किसान और उनके परिवारों को सपोर्ट देती है. एफआरपी के तहत गन्ना किसानों को पेमेंट करना होता है हम ये चाहते हैं और सरकार भी चाहती है कि किसानों की आमदनी बढ़े और इसलिए सरकार कुछ सालों से हर साल FRP बढ़ा रही है. पिछले 5 साल में लगभग एफआरपी 30 फीसदी बढ़ गया है और कुछ राज्यों में में एफआरपी 2025 में भी बढ़ाया गया है.

चीनी बिक्री मूल्य बढ़ाकर 42 रुपये करे सरकार

वहीं, चीनी का मिनिमम सेलिंग प्राइस यानी MSP नहीं बढ़ाया गया है, जो है लगभग 5 साल से रिवाइज नहीं हुआ है. वर्तमान में चीनी का एमएसपी भी लगभग 31 रुपये है. इसलिए हम सरकार से ये मांग कर रहे हैं कि चीनी के MSP को लगभग 41-42 रुपये प्रति किलो कर दिया जाए. ताकि, मिलों को इंडस्ट्री को कॉस्ट और प्रोडक्शन मिल जाए और उससे जो इंडस्ट्री को किसानों को भुगतान करने में आसानी होगी.

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कम इथेनॉल आवंटन और इथेनॉल की स्थिर कीमतों पर भी चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि डिस्टिलरी क्षमता का पूरा उपयोग न हो पाने से उद्योग को और अधिक नुकसान हो सकता है. किसानों के भुगतान, इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्यों और ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए उद्योग ने सरकार से तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है.

इथेनॉल प्रोग्राम ने आसानी की है, लेकिन ब्लेंडिंग टारगेट बढ़ाया जाए

दीपक बल्लानी ने कहा कि इथेनॉल एलोकेशन प्रोग्राम लगभग 10 साल से चल रहा है. इसके पहले इंडस्ट्री के लिए चीनी एक मात्र प्रोडक्ट था और यही रेवेन्यू सोर्स था. क्योंकि, शुगर प्रोडक्शन मौसम पर निर्भर है इस वजह से कई बार जब उत्पादन अच्छा नहीं होता था या ज्यादा हो जाता था तो किसानों को भुगतान करने में दिक्कतें होती थीं. लेकिन, जब से इथेनॉल प्रोग्राम आया है तब से इंडस्ट्री के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट होने लगा है. इससे इंडस्ट्री को किसानों का पेमेंट हमेशा रेगुलर करने में आसानी हुई है.

पिछले 5 साल में सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग 20 फीसदी पर हम पहुंच गए हैं, इससे गन्ना किसानों को बहुत बड़ा फायदा हुआ है. इस साल क्योंकि हमारी कैपेसिटी इतनी बढ़ गई है और उसके किसानों के गन्ने को इस्तेमाल करने का विकल्प मिला है. इसलिए सरकार से हमने ये गुजारिश की है कि इसकी ब्लेंडिंग बढ़ाई जाए और उसे लगभग 30 फीसदी तक किया जाए. इसके साथ ही E100 flex fuel launch किया जाए. इससे इंडस्ट्री के साथ ही किसानों को भी बहुत बड़ा सपोर्ट मिलेगा. इस बजट में हमें उमीद है कि सरकार इथेनॉल (Ethanol) आवंटन और इथेनॉल प्राइस करेक्शन (ethanol price correction) के के साथ ही E20 से ज्यादा ब्लेंडिंग पर ध्यान देना होगा.

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Published: 21 Jan, 2026 | 03:46 PM

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