Haryana wheat scam: हरियाणा में धान के बाद गेहूं घोटाले का मामला तूल पकड़ते जा रहा है. आरोप है कि उत्तर प्रदेश से गेहूं लाकर हरियाणा की मंडियों में फर्जी तरीके से बेचा गया है. ऐसे गेहूं की खरीद पर भी सवाल उठने लगे हैं. इस मामले में एक सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक ने कार्रवाई की मांग की है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विरेंद्र लाठर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर हरियाणा में धान और गेहूं खरीद में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. विरेंद्र लाठर ने आरोप लगाया कि आढ़तियों, राइस मिलरों, मंडी समितियों के अधिकारियों और खरीद एजेंसियों की मिलीभगत से खरीफ 2025 सीजन में ‘फर्जी खरीद’ की गई और इसी तरह की अनियमितताएं मौजूदा खरीद सीजन में भी जारी हैं. खरीद के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में 36 लाख मीट्रिक टन के सरकारी लक्ष्य के मुकाबले 62.13 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई. जबकि हरियाणा में गैर-बासमती धान का अनुमानित उत्पादन करीब 48 लाख मीट्रिक टन बताया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि 2024-25 में वास्तविक खरीद 53.99 लाख मीट्रिक टन रही.
गेहूं की खरीद के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए
उन्होंने लिखा कि यह आंकड़े दिखाते हैं कि उत्पादन से ज्यादा खरीद हो रही है, जिससे गड़बड़ी की आशंका बढ़ती है. ऐसे मामलों की जांच जरूरी है ताकि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों का सिस्टम पर भरोसा मजबूत हो सके. उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक उत्पादन से अधिक खरीद फर्जी बिलिंग के जरिए की गई हो सकती है. इसके साथ ही उन्होंने इस सीजन में गेहूं की खरीद के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि खराब मौसम की परिस्थितियों के बावजूद 14 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं की खरीद कैसे हो गई?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ आढ़तियों ने उत्तर प्रदेश से कम दाम पर बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदकर उसे करनाल की मंडियों में MSP पर खरीदा हुआ दिखाया. इसके लिए MFMB पोर्टल पर अधिकतम संभावित उत्पादन और असली उत्पादन के बीच के अंतर में हेरफेर किया गया और उसका फायदा उठाया गया.
आढ़तियों के खिलाफ एफआईर दर्ज
दरअसल, हरियाणा में पिछले खरीफ सीजन में धान खरीद घोटाले के आरोपों के बाद अब गेहूं खरीद सीजन में भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं. जांच में पता चला कि उत्तर प्रदेश के गैर-पंजीकृत किसानों का गेहूं फर्जी तरीके से करनाल के किसानों के नाम पर जिले की अलग-अलग मंडियों में बेचा गया. मामले की जांच के बाद करनाल, इंद्री और बियाना सब-यार्ड के छह आढ़तियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. यह कार्रवाई एडीसी राहुल राय्या की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई. जांच में सामने आया कि कुछ व्यापारियों ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की बची हुई मात्रा का गलत इस्तेमाल किया. आरोप है कि उत्तर प्रदेश से आए गेहूं को हरियाणा के किसानों के नाम पर सिस्टम में दर्ज कर एमएसपी पर बेचा गया.