धान के पौधे रह गए छोटे और कमजोर? ये आसान उपाय बढ़ा सकते हैं फसल की पैदावार

धान की फसल में पौधों की असमान बढ़वार उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सही जल प्रबंधन, संतुलित पोषण और जैविक उपाय अपनाकर पौधों की वृद्धि को बेहतर बनाया जा सकता है. समय रहते समस्या की पहचान और उचित देखभाल से फसल मजबूत बनती है और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है.

नोएडा | Updated On: 13 Jun, 2026 | 09:56 AM

Paddy Farming: धान की खेती के दौरान कई किसानों को यह समस्या देखने को मिलती है कि कुछ पौधे तेजी से बढ़ते हैं, जबकि कुछ पौधे छोटे और कमजोर रह जाते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ये समस्या खेत में पानी और पोषक तत्वों के असमान वितरण के कारण होती है. जब खेत का कोई हिस्सा अधिक पानी प्राप्त करता है और कोई हिस्सा कम, तो पौधों की बढ़वार भी अलग-अलग हो जाती है. इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ता है. यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो पैदावार में कमी आ सकती है.

खेत का समतल होना है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती  में खेत का पूरी तरह समतल होना बेहद जरूरी है. समतल खेत में पानी हर हिस्से तक समान रूप से पहुंचता है, जिससे पौधों को बराबर मात्रा में पोषण मिलता है. यदि खेत ऊंचा-नीचा है तो कुछ जगह पानी जमा हो जाता है और कुछ हिस्सों में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पाती. ऐसे क्षेत्रों में पौधे कमजोर रह जाते हैं और उनकी बढ़वार रुक जाती है. इसलिए रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह लेवलिंग करना जरूरी माना जाता है.

जैविक खाद से सुधर सकती है पौधों की बढ़वार

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, कमजोर पौधों की बढ़वार बढ़ाने  के लिए जैविक खाद का उपयोग काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. किसान सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और मुर्गी की खाद का प्रयोग कर सकते हैं. ये खादें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी उपलब्ध कराती हैं. नियमित रूप से जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और पौधों का विकास समान रूप से होने लगता है. इससे फसल मजबूत बनती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है.

जैविक घोल और अन्य उपायों से मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल  में जैविक घोल का उपयोग भी काफी लाभकारी होता है. इसके लिए किसान पानी में गुड़, बेसन और जैविक कल्चर मिलाकर घोल तैयार कर सकते हैं और इसे सिंचाई के साथ खेत में दे सकते हैं. यह घोल मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाता है और पौधों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराता है. इसके अलावा समुद्री शैवाल आधारित जैविक उत्पादों का उपयोग भी पौधों की बढ़वार सुधारने में मददगार माना जाता है. सही समय पर इन उपायों को अपनाकर किसान धान की पौध को मजबूत, हरा-भरा और एक समान विकसित बना सकते हैं, जिससे फसल की पैदावार में अच्छा सुधार देखा जा सकता है.

Published: 13 Jun, 2026 | 10:10 AM

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