कम लागत में ज्यादा पैदावार कैसे पाएंगे किसान, IFFCO के MD के.जे. पटेल ने बताया खेती का नया और आसान तरीका

Smart Farming: खेती तेजी से बदल रही है और नई तकनीक किसानों के लिए उम्मीद बन रही है. नैनो यूरिया, ड्रोन और सहकारिता मॉडल से अब कम लागत में बेहतर पैदावार संभव हो रही है. IFFCO के एमडी के. जे. पटेल ने बताया कि सही जानकारी और आधुनिक तरीकों से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और भविष्य सुरक्षित बना सकते हैं.

नोएडा | Published: 26 Mar, 2026 | 06:50 PM

Agriculture Technology: खेती का रूप बदल रहा है, तकनीक लगातार आगे बढ़ रही है और दुनिया में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे खेतों तक महसूस होने लगा है. ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में किसान कैसे अपनी लागत घटाएं, पैदावार बढ़ाएं और स्मार्ट खेती की ओर कदम बढ़ाएं, यह सवाल बहुत जरूरी बन गया है. इस पर किसान इंडिया के खास शो माइक पे मुलाकात  में IFFCO ग्रुप के MD के. जे. पटेल ने विस्तार से चर्चा की और बताया कि नैनो खाद, नई तकनीक और सहकारिता मॉडल कैसे किसानों की जिंदगी बदल रहा है.

नैनो यूरिया- नई सोच, नई खेती

के. जे. पटेल ने बताया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी खेती  में एक नई शुरुआत है. पहले किसान 45 किलो की बोरी का उपयोग करते थे, लेकिन अब कम मात्रा में ज्यादा असर देने वाली नैनो तकनीक आई है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में किसानों को थोड़ी परेशानी हुई क्योंकि यह लिक्विड रूप में है. खेत में छिड़काव करने का तरीका भी नया है, इसलिए कुछ किसानों को समझने में समय लगा. लेकिन धीरे-धीरे किसान इसे अपना रहे हैं और अच्छे नतीजे भी मिल रहे हैं.

खेती में तकनीक और ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल

नैनो खाद को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए अब ड्रोन की मदद ली जा रही है. IFFCO ने हजारों ड्रोन खरीदे हैं और गांव के युवाओं को ट्रेनिंग देकर ड्रोन पायलट बनाया है. इससे किसानों को फायदा हो रहा है क्योंकि अब खेत में जल्दी और सही मात्रा में छिड़काव हो जाता है. खासकर छोटे किसानों  के लिए यह एक बड़ा सहारा बन रहा है. इससे समय भी बचता है और मेहनत भी कम लगती है.

युद्ध का असर और खाद सप्लाई की चिंता

ईरान-इजराइल  जैसे तनाव का असर भारत की खेती पर भी पड़ सकता है. के. जे. पटेल ने बताया कि भारत कुछ हद तक खाद आयात करता है और युद्ध की वजह से सप्लाई कम हो सकती है. हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश में उत्पादन भी हो रहा है और जरूरत को पूरा करने की कोशिश जारी है. साथ ही नैनो खाद जैसे नए विकल्प इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं.

लागत कम, कमाई ज्यादा कैसे?

पटेल ने साफ कहा कि आज किसान को सबसे ज्यादा चिंता लागत की होती है. यूरिया की एक बोरी  की असली लागत हजारों रुपये होती है, लेकिन सरकार सब्सिडी देकर इसे सस्ता बनाती है. नैनो खाद के इस्तेमाल से कम मात्रा में ज्यादा फायदा मिलता है. इससे किसान की लागत घटती है और जमीन की सेहत भी सुधरती है. लंबे समय में यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

सहकारिता मॉडल-किसानों की ताकत

IFFCO  एक सहकारी संस्था है, यानी यह किसानों की अपनी संस्था है. के. जे. पटेल ने बताया कि इसमें जो भी फायदा होता है, वह सीधे किसानों के हित में जाता है. उन्होंने कहा कि युवा अगर सहकारिता से जुड़ें, तो गांव में ही रोजगार के नए मौके बन सकते हैं. इससे गांव मजबूत होंगे और खेती भी आगे बढ़ेगी.

नई तकनीक और जागरूक किसान

पटेल ने कहा कि अब खेती सिर्फ खाद डालने तक सीमित नहीं है. इसमें मिट्टी की जांच, सही बीज, जैविक खाद  और नई तकनीक का इस्तेमाल जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसान सही जानकारी के साथ काम करेगा, तो उसकी पैदावार और कमाई दोनों बढ़ेंगी. साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.

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