लंबे समय तक ताजा रहेगी और न सूखेगी न सड़ेगी.. IIVR की नई सब्जी किस्म ‘काशी विशान’ का जलवा

वाराणसी के IIVR में विकसित काशी विशान लोबिया किसानों के लिए मुनाफे का नया अवसर बन रही है. ये किस्म लंबे समय तक ताजा रहती है और बाजार में बेहतर दाम दिला रही है. मजबूत बनावट और अच्छी गुणवत्ता के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को नई उम्मीद मिली है.

नोएडा | Published: 5 May, 2026 | 01:52 PM

Cowpea Farming: भारत में खेती अब तेजी से बदल रही है. एक तरफ इंदौर में आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में स्मार्ट खेती, एआई तकनीक और आधुनिक कृषि व्यापार पर चर्चा हो रही है, तो दूसरी ओर वाराणसी के वैज्ञानिक किसानों के लिए ऐसी फसलें तैयार कर रहे हैं जो खेती को ज्यादा मुनाफेदार बना सकें. इसी कड़ी में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में विकसित लोबिया की नई किस्म काशी विशान किसानों और निर्यातकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसकी खास बात यह है कि यह जल्दी खराब नहीं होती, लंबे समय तक ताजा रहती है और बाजार में सामान्य किस्मों से ज्यादा कीमत दिलाती है.

लंबी दूरी तक ताजा रहती है काशी विशान

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार दुबे (Rakesh Kumar Dubey) के अनुसार, सामान्य लोबिया तोड़ने के एक-दो दिन बाद ही सूखने और सड़ने लगती है. लेकिन काशी विशान (Kashee Vishan) की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत बनावट और लंबी शेल्फ लाइफ है. ये तोड़ाई के बाद भी करीब तीन दिन तक हरी-भरी और ताजा बनी रहती है. इसकी फलियां आकर्षक रंग, समान आकार और मजबूत बनावट वाली होती हैं, जिससे लंबी दूरी के परिवहन में भी इसकी गुणवत्ता खराब नहीं  होती. यही वजह है कि सब्जी निर्यातक इसे पहली पसंद मान रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये किस्म अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करती है, इसलिए भविष्य में इसकी मांग कई देशों में बढ़ सकती है.

नई लोबिया किस्म से किसानों को मिलेगा ज्यादा मुनाफा लगातार.

किसानों को मिल रहा ज्यादा मुनाफा

काशी विशान सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि किसानों के लिए कमाई  का नया जरिया भी बन रही है. आजमगढ़ जिले के सराय ग्राम पंचायत के किसान रामजतन ने IIVR से बताया कि एक हेक्टेयर में इसकी खेती कर लगभग 150 क्विंटल उत्पादन हासिल किया. खास बात ये रही कि उन्हें बाजार में पारंपरिक लोबिया की तुलना में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा दाम मिला. किसानों का कहना है कि इस किस्म की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि व्यापारी और ग्राहक दोनों इसकी गुणवत्ता से खुश हैं. लंबे समय तक ताजा रहने के कारण खराब होने का नुकसान भी कम होता है. इससे किसानों को सीधे तौर पर ज्यादा मुनाफा मिलता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इस किस्म की खेती करें तो उनकी आय में बड़ा बदलाव आ सकता है. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक किस्मों को छोड़कर काशी विशान की खेती की ओर बढ़ रहे हैं.

पांच महीने में तैयार होती है फसल

वैज्ञानिकों के मुताबिक, काशी विशान की फसल लगभग पांच महीने में तैयार हो जाती है. इसकी खेती को दूसरी फसलों के साथ भी आसानी से जोड़ा जा सकता है. किसान इसे फसल चक्र में शामिल करके बेहतर उत्पादन  और अतिरिक्त आय हासिल कर सकते हैं. इस किस्म की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रोग लगने का खतरा कम रहता है. मजबूत गुणवत्ता और बेहतर संरचना के कारण फसल जल्दी खराब नहीं होती. इससे किसानों को भंडारण और परिवहन में भी राहत मिलती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह किस्म भारतीय सब्जी निर्यात को नई पहचान दिला सकती है. खासकर उन किसानों के लिए यह फायदेमंद साबित होगी जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं.

लोबिया की नई किस्म काशी विशान.

स्मार्ट खेती और नई तकनीक से बदल रही कृषि

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भी खेती को आधुनिक तकनीक  से जोड़ने पर जोर दिया गया. सम्मेलन में स्मार्ट खेती, एआई (AI) तकनीक, कृषि व्यापार और नई फसल किस्मों पर चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की खेती केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं चलेगी, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों का सहारा लेना जरूरी होगा. काशी विशान जैसी नई किस्में इसी बदलाव का उदाहरण हैं. ये दिखाती हैं कि वैज्ञानिक अनुसंधान से किसानों की सबसे बड़ी समस्याओं -खराब होने वाली फसल, कम दाम और निर्यात में दिक्कत-का समाधान निकाला जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज और सही बाजार मिले तो भारतीय खेती दुनिया के बड़े बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है. आने वाले वर्षों में ऐसी उन्नत किस्में किसानों  की आय बढ़ाने और भारत को कृषि निर्यात में मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

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