Report: जायद फसलों की बुवाई में सुस्ती, धान और मक्का का रकबा घटा, दालों की ओर बढ़े किसान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल 4.27 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी की फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 4.37 मिलियन हेक्टेयर था. पिछले साल कुल जायद फसलों का रकबा 8.4 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचा था.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 25 Mar, 2026 | 08:12 AM

India summer crop sowing 2026: देश में इस साल गर्मी (जायद) की फसलों की बुवाई थोड़ी धीमी नजर आ रही है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल बोया गया रकबा पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है और स्थिति संभल सकती है.

इस बार जहां धान और मक्का जैसी फसलों का रकबा घटा है, वहीं दालों की खेती में बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत के रूप में सामने आई है.

कितनी हुई बुवाई, क्या कहते हैं आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 मार्च तक कुल 4.27 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी की फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 4.37 मिलियन हेक्टेयर था. गौर करने वाली बात यह है कि बुवाई का सीजन अभी जारी है. पिछले साल कुल जायद फसलों का रकबा 8.4 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचा था, इसलिए उम्मीद है कि इस बार भी अंतिम आंकड़े बेहतर हो सकते हैं.

जायद फसल क्या होती है, समझिए

भारत में खेती मुख्य रूप से तीन सीजन में होती है रबी, खरीफ और जायद. जायद यानी गर्मी की फसलें मार्च से जून के बीच उगाई जाती हैं. ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और ज्यादातर सिंचाई वाले क्षेत्रों में बोई जाती हैं. इसमें धान, मक्का, दालें और कुछ तिलहन शामिल होते हैं.

धान और मक्का की बुवाई में कमी

इस साल धान की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है. धान का रकबा घटकर 2.78 मिलियन हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 2.86 मिलियन हेक्टेयर था.

मक्का की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही. इसका रकबा घटकर 4.24 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल यह 5 लाख हेक्टेयर था. इस वजह से कुल मोटे अनाज (कोर्स सीरियल) का क्षेत्र भी घटकर 6.04 लाख हेक्टेयर रह गया है.

दालों ने दिखाया अच्छा प्रदर्शन

जहां कुछ फसलें पीछे रहीं, वहीं दालों की खेती ने अच्छा प्रदर्शन किया है. इस साल दालों का कुल रकबा बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 3.47 लाख हेक्टेयर था. खासकर मूंग और उड़द जैसी फसलों की बुवाई बढ़ी है. किसान अब ऐसी फसलों की ओर झुक रहे हैं जो कम समय में तैयार हो जाएं और जिनमें लागत भी कम लगे.

तिलहन में ज्यादा बदलाव नहीं

तिलहन फसलों के क्षेत्र में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया है. इस साल इनका रकबा करीब 4.69 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 4.73 लाख हेक्टेयर था. इससे यह साफ है कि तिलहन की खेती में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है.

क्यों आई बुवाई में कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शुरुआती मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा, जिसकी वजह से बुवाई धीमी हुई. कई जगहों पर तापमान ज्यादा था और नमी की कमी भी देखने को मिली, जिससे किसानों ने बुवाई में देरी की. हालांकि अब मौसम में सुधार हो रहा है, जिससे आगे बुवाई तेज होने की उम्मीद है.

देश में अनाज का स्टॉक मजबूत

एक अच्छी खबर यह भी है कि देश में अनाज का भंडार पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 तक देश के पास कुल 58.4 मिलियन टन खाद्यान्न का स्टॉक था, जो तय बफर सीमा 21.41 मिलियन टन से काफी ज्यादा है. इसमें गेहूं का स्टॉक 27.46 मिलियन टन और चावल का स्टॉक 30.93 मिलियन टन रहा.

इससे साफ है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य योजनाओं के लिए फिलहाल अनाज की कोई कमी नहीं है.

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Published: 25 Mar, 2026 | 08:11 AM
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