गर्मियों में बड़े काम की है कुंदरू की सब्जी, कब्ज से छुटकारा दिलाने के साथ ही कई बीमारियों की रोकथाम में मददगार

Ivy Gourd Curry: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वाराणसी स्थित सब्जी विज्ञान केंद्र ने कहा है कि कुंदरू में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट और शुगर दोनों का ध्यान रखता है. गर्मियों में इसकी सब्जी का सेवन अचानक बढ़ने वाली शुगर नियंत्रित करने में मददगार होती है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 05:03 PM

प्रकृति हमें कुछ ऐसी सब्जियां देती है जो दिखने और खाने में भले ही ज्यादा स्वादिष्ट नहीं होती हैं, लेकिन वह गुणों का खजाना होती हैं. गर्मियों के सीजन के साथ ही बाजार में कुंदरू आसानी से मिल जाता है. परवल की तरह दिखने वाला कुंदरू कई रोगों और हार्मोन को नियंत्रित करने में लाभकारी है. कुंदरू में फाइबर, विटामिन ए और सी भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं और इसकी सब्जी आसानी से बनकर तैयार भी हो जाती है.

गर्मियों की पेट के लिए बेहद लाभकारी है कुंदरू की सब्जी

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वाराणसी स्थित सब्जी विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार कुंदरू में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट और शुगर दोनों का ध्यान रखता है. कुंदरू की सब्जी का सेवन करने से खाना खाने के बाद अचानक बढ़ने वाली शुगर नियंत्रित रहती है. यही कारण है कि इस सब्जी को मधुमेह के रोगियों के लिए संजीवनी कहा गया है. पाचन में आसान होने से जल्दी पच भी जाती है और पेट को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. बच्चों से लेकर बुजुर्गों के लिए यह सब्जी फायदेमंद है.

कुंदरू हृदय और कोलेस्ट्रॉल दोनों के लिए लाभकारी है. यह शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है और नसों की ब्लॉकेज का खतरा भी कम करता है. अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ रहता है, तो इसका सेवन हफ्ते में तीन बार कर सकते हैं. इसके अलावा कुंदरू में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और पचने में हल्का रहता है.

कब्ज में दवा का काम करता है कुंदरू

अगर कब्ज की परेशानी रहती है, तो कुंदरू का सेवन दवा की तरह काम करेगा. यह पुरानी से पुरानी कब्ज को तोड़ने की क्षमता रखता है. कुंदरू में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, और यही कारण है कि कुंदरू के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. यह मौसम बदलने के साथ होने वाले छोटे-छोटे रोगों से सुरक्षा देता है. इसके अलावा, विटामिन सी और विटामिन ए बालों और स्किन के लिए भी लाभकारी हैं. विटामिन सी और विटामिन ए बालों और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं.

कुंदरू की चाहे तो सब्जी बनाकर खा सकते हैं, लेकिन अगर कुंदरू का पूरा पोषण लेना है तो इसको भाप में पकाकर हल्का फ्राई कर कम मसालों के साथ खा सकते हैं. यह भले ही स्वाद में बेहतरीन नहीं होगा, लेकिन सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं है.

हर तीसरे दिन तुड़ाई कर कमाई कराती है कुंदरू

सब्जी विज्ञान केंद्र वाराणसी के अनुसार कुंदरू यानी टिंडोरा एक बारहमासी बेल वाली सब्जी है, जिसकी खेती गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी होती है और यह किसानों को सालभर कमाई देती है. इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी (pH 6.5–7.5) उपयुक्त होती है. उत्तर भारत में इसकी रोपाई फरवरी-मार्च या जून-जुलाई में की जाती है, जिसमें बीज के बजाय बेल की कटिंग लगाना लाभकारी रहता है. पौधों के लिए मचान (ट्रेलिस) बनाना जरूरी है, जिससे बेल अच्छी तरह फैलती है और उत्पादन बढ़ता है. फल 2-3 महीने में आना शुरू हो जाते हैं और हर 3-4 दिन में तुड़ाई की जा सकती है. उचित देखभाल से 150–200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है, जिससे यह एक लाभदायक सब्जी फसल साबित होती है.

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Published: 29 Mar, 2026 | 05:01 PM
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