Fertilizer Black Marketing: हरियाणा के करनाल में खरीफ बुवाई सीजन से पहले खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने हांसी रोड स्थित एक गोदाम पर छापा मारकर भारी मात्रा में खाद और कृषि उत्पाद बरामद किए. जांच में सामने आया कि उर्वरक सामान बिना वैध लाइसेंस के रखा और बेचा जा रहा था. वहीं, जांच के दौरान फर्म के संचालक स्टॉक रजिस्टर और बिल बुक जैसे जरूरी दस्तावेज भी नहीं दिखा सके. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. वजीर सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि जांच टीम में सीएम फ्लाइंग स्क्वॉड के अधिकारियों के साथ सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी अनिल कुमार, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर सुनील कुमार और प्लांट प्रोटेक्शन विशेषज्ञ अमरजीत सिंह शामिल थे. उन्होंने कहा कि जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद सदर बाजार थाने में मेसर्स मोहन एंटरप्राइजेज और उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के खरगपुर निवासी अमित कुमार पांडे के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धाराओं 3, 7 और 10 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है.
55 खाद दुकानों की जांच की गई
डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और सब्सिडी वाले खाद के साथ गैर-सब्सिडी उत्पादों की जबरन बिक्री रोकने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है. डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि अब तक जिले में 55 खाद दुकानों पर अचानक जांच की जा चुकी है. गड़बड़ी मिलने पर तीन खाद विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जबकि 10 अन्य विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं.
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5.30 लाख एकड़ में खेती
उन्होंने चेतावनी दी कि खाद की जमाखोरी करने या किसानों को खाद के साथ गैर-सब्सिडी वाले उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. डॉ. सिंह ने कहा कि खरीफ सीजन में करनाल जिले में करीब 5.30 लाख एकड़ में खेती होती है. इसमें लगभग 4.70 लाख एकड़ में धान, 42 हजार एकड़ में गन्ना और करीब 38 हजार एकड़ में अन्य फसलें उगाई जाती हैं.
1.05 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में करनाल जिले को करीब 1.05 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 20 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत होती है. 26 मई तक जिले में लगभग 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 3 हजार मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक उपलब्ध था. मेरी फसल मेरा ब्यौरापोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही किसान पीओएस मशीन के जरिए खाद खरीद सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि जिले में फिलहाल खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. डॉ. वजीर सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वे खाद, बीज और कीटनाशक हमेशा पक्के बिल पर ही खरीदें. किसी भी परेशानी की स्थिति में किसान अपने ब्लॉक कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.