मार्च की गर्मी से गेहूं को खतरा, सही छिड़काव और हल्की सिंचाई से किसान बचा सकते हैं फसल और उत्पादन

मार्च में बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है. राजस्थान कृषि विभाग ने किसानों को पत्तियों पर पोषक तत्वों का छिड़काव और हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है. सही समय पर ये उपाय अपनाने से दाना भराव बेहतर रहता है और फसल को गर्मी के असर से बचाया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 9 Mar, 2026 | 01:28 PM

Wheat Crop: मार्च की शुरुआत के साथ ही मौसम ने करवट ले ली है. दिन का तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और इसका असर अब खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पर भी दिखाई देने लगा है. इस समय गेहूं की फसल सबसे अहम दौर यानी दाना भराव की अवस्था में होती है. अगर इस दौरान ज्यादा गर्मी पड़ जाए तो दाने ठीक से नहीं भर पाते, उनका आकार छोटा रह जाता है और उत्पादन कम होने का खतरा बढ़ जाता है. इसी स्थिति को देखते हुए राजस्थान कृषि विभाग ने किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है. विभाग का कहना है कि यदि किसान समय रहते कुछ आसान वैज्ञानिक उपाय अपनाएं, तो गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और फसल का उत्पादन भी सुरक्षित रखा जा सकता है.

बढ़ते तापमान से फसल पर बढ़ा खतरा

राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार मार्च महीने में अचानक बढ़ने वाला तापमान गेहूं के लिए चुनौती  बन सकता है. इस समय पौधे के अंदर दाने बनने और भरने की प्रक्रिया चल रही होती है. अगर तापमान बहुत ज्यादा हो जाए तो पौधे जल्दी सूखने लगते हैं और दाने सिकुड़ सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा गर्मी से गेहूं के दानों का वजन कम हो जाता है. इससे न केवल उत्पादन घटता है बल्कि फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है. इसलिए इस समय खेत की सही देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. समय पर सिंचाई और पौधों को जरूरी पोषण देने से इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

पत्तियों पर छिड़काव सबसे असरदार उपाय

राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार, बढ़ते तापमान से फसल को बचाने के लिए पत्तियों पर पोषक तत्वों का छिड़काव यानी फोलियर स्प्रे करना बेहद फायदेमंद माना जाता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे 100 लीटर पानी में 2 किलोग्राम यूरिया मिलाकर गेहूं की पत्तियों पर छिड़काव करें. इससे पौधों को तुरंत पोषण मिलता है और वे गर्मी के तनाव को सहने में सक्षम बनते हैं. इसी तरह 100 लीटर पानी में 2 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर छिड़काव करना भी काफी लाभकारी बताया गया है. यह पोषक तत्व पौधों को मजबूती देता है और दानों के सही विकास में मदद करता है. इसके अलावा 200 ग्राम पोटेशियम क्लोराइड या कैल्शियम क्लोराइड को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है. यह पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है और उन्हें गर्मी से बचाने में मदद करता है.

बढ़ती गर्मी में गेहूं की फसल बचाने के आसान उपाय.

वैज्ञानिक घोल से बढ़ेगी गर्मी सहने की क्षमता

कृषि विशेषज्ञों ने एक खास वैज्ञानिक घोल के बारे में भी बताया है, जो फसल को गर्मी  से बचाने में काफी मददगार हो सकता है. इसके लिए 8 ग्राम सेलिसिलिक अम्ल को पहले 225 मिलीलीटर इथाइल अल्कोहल में अच्छी तरह घोलना होता है. इसके बाद इस घोल को 100 लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है. यह घोल पौधों की अंदरूनी ताकत बढ़ाने में मदद करता है और उन्हें गर्मी के तनाव को सहने के लिए तैयार करता है. अगर मौसम में गर्मी का असर लगातार बना रहता है, तो किसान 15 दिन के अंतराल पर इनमें से किसी भी एक घोल का छिड़काव दोबारा कर सकते हैं.

खेत में नमी बनाए रखना भी जरूरी

सिर्फ छिड़काव ही नहीं, बल्कि खेत में नमी  बनाए रखना भी इस समय बहुत जरूरी है. राजस्थान कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में हल्की और समय-समय पर सिंचाई करते रहें. जब मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, तो पौधों की जड़ें ठंडी रहती हैं और वे गर्मी के असर को बेहतर तरीके से सह पाते हैं. नमी बनी रहने से पौधों में वाष्पीकरण की प्रक्रिया भी सामान्य रहती है, जिससे फसल मुरझाने से बच जाती है.

इन उपायों से बढ़ेगा उत्पादन और गुणवत्ता

इन वैज्ञानिक उपायों को अपनाने से गेहूं की फसल को कई फायदे मिलते हैं. इससे पौधों की अंतिम पत्ती यानी फ्लैग लीफ मजबूत होती है, जो दानों को ऊर्जा देने का सबसे बड़ा काम करती है. जब पौधों को सही पोषण मिलता है तो दाने अच्छे आकार के बनते हैं, उनका रंग और चमक बेहतर रहती है और उनका वजन भी कम नहीं होता. इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी गुणवत्ता वाली फसल  भी मिलती है.

कृषि विभाग ने यह भी सलाह दी है कि छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय ही करना चाहिए. दोपहर की तेज धूप में छिड़काव करने से दवा का असर कम हो सकता है. अगर किसान इन आसान और वैज्ञानिक उपायों को अपनाते हैं, तो बढ़ती गर्मी के बावजूद गेहूं की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

Published: 9 Mar, 2026 | 01:27 PM

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