Tip Of The Day: मार्च में नींबू के बाग में फैल रहे हैं रोग? एक्सपर्ट से जानें बचाव के कारगर उपाय

Lemon Farming In March: मार्च का महीना नींबू वर्गीय फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस समय पौधों में नई कोंपलें और फूल बनने लगते हैं, लेकिन कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर किसान समय पर कीट-रोग नियंत्रण और सही देखभाल करें, तो नींबू उत्पादन में बढ़ोतरी मिलती है. पढ़ें एक्सपर्ट ने क्या टिप्स दिए हैं...

Isha Gupta
नोएडा | Published: 11 Mar, 2026 | 12:27 PM

Lemon Farming: भारत में नींबू वर्गीय फसलें-जैसे नींबू, कागजी नींबू, संतरा, मौसमी और किन्नू-किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण सोर्स मानी जाती हैं. खासकर उत्तर भारत में मार्च का महीना इन फसलों के लिए बेहद अहम होता है. इस समय सर्दी का असर कम होने लगता है और तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे वसंत ऋतु का असर दिखाई देने लगता है. यह मौसम पौधों में नई कोंपलें निकलने, फूल बनने और फल बनने की प्रक्रिया के लिए अनुकूल माना जाता है.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) से बातचीत के दौरान बताया कि, अगर किसान इस समय नींबू के बागों की वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करें, तो पौधों में फलधारण बेहतर होता है, फलों का झड़ना कम होता है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर मिलती है.

मार्च का मौसम क्यों है फायदेमंद

मार्च के महीने में तापमान संतुलित रहता है और पौधों की ग्रोथ तेज होने लगती है. इसी समय नींबू के पौधों में नई पत्तियां और कोंपलें निकलती हैं, जो आगे चलकर फूल और फल बनने में मदद करती हैं. यदि इस समय पौधों को पर्याप्त पोषण और सही देखभाल मिले, तो उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इसलिए किसान इस मौसम को नींबू के बागों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय मानते हैं.

कीटों से बचाव के जरूरी उपाय

तापमान बढ़ने के साथ-साथ मार्च में कई तरह के कीट भी सक्रिय हो जाते हैं, जो नींबू की फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें सिट्रस लीफ माइनर, सिट्रस पायला और स्केल कीट प्रमुख हैं. सिट्रस लीफ माइनर नई पत्तियों में सुरंग बनाकर उन्हें खराब कर देता है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है. इसके नियंत्रण के लिए नीम तेल या डाइमिथोएट का छिड़काव किया जा सकता है. सिट्रस पायला पत्तियों से रस चूसकर पौधों को कमजोर बना देता है. इससे पौधे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं. इस कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव उपयोगी माना जाता है.

वहीं स्केल कीट शाखाओं और फलों पर चिपककर पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं. इनसे बचाव के लिए नीम तेल या क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है.

नींबू के पौधों को रोगों से कैसे बचाएं

नींबू की फसल में कई तरह के रोग भी देखने को मिलते हैं, जिनमें एन्थ्रेक्नोज, साइट्रस कैंकर और गमोसिस प्रमुख हैं. ये रोग समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. एन्थ्रेक्नोज रोग में पत्तियों और फलों पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इस रोग से बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव किया जाता है. साइट्रस कैंकर एक बैक्टीरियल रोग है, जिसमें पत्तियों और फलों पर घाव जैसे निशान बन जाते हैं.

इसके नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का मिश्रण असरदार माना जाता है. गमोसिस रोग में पेड़ के तने से गोंद जैसा पदार्थ निकलने लगता है. इस समस्या से बचाव के लिए प्रभावित हिस्से को साफ करके उस पर बोर्डो पेस्ट लगाना चाहिए.

सही देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान मार्च महीने में समय पर कीट और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाते हैं, तो नींबू के पौधे स्वस्थ रहते हैं और फलधारण बेहतर होता है. इससे फलों की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है और किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है. इसलिए नींबू की खेती करने वाले किसानों को मार्च के महीने में अपने बागों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही दवाइयों का इस्तेमाल करना चाहिए. सही समय पर की गई देखभाल से नींबू की फसल से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है.

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