Milky Mushroom: बरसात का मौसम किसानों के लिए सिर्फ खरीफ फसलों का ही नहीं, बल्कि मशरूम उत्पादन का भी सुनहरा अवसर लेकर आता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बारिश के दौरान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान मिल्की मशरूम (Calocybe indica) की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. कम लागत, सीमित जगह और नियंत्रित वातावरण में तैयार होने वाली यह फसल किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है. सही तकनीक और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर कम समय में अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
25 से 35 डिग्री तापमान में बेहतर होती है मिल्की मशरूम की बढ़वार
प्रमोद कुमार के मुताबिक, मिल्की मशरूम की खेती के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अनुकूल रहता है. यही कारण है कि बरसात का मौसम इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस मशरूम का उत्पादन बंद कमरे, झोपड़ी या नियंत्रित वातावरण वाले शेड में आसानी से किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि मिल्की मशरूम की खासियत यह है कि यह गर्म और आर्द्र वातावरण में भी अच्छी फ्रूटिंग देती है. यही वजह है कि मानसून के दौरान इसकी खेती से किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है.
फसल अवशेषों से तैयार किए जाते हैं मशरूम के बैग
मिल्की मशरूम की खेती के लिए गन्ने का पुआल, गेहूं का भूसा, सरसों की तुड़ी तथा दलहन और तिलहन फसलों के सूखे अवशेषों का उपयोग किया जा सकता है. हालांकि, यह जरूरी है कि उपयोग में लाया जाने वाला फसल अवशेष भीगा हुआ न हो. विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले इन अवशेषों को हवादार बोरी में भरकर लगभग 18 घंटे तक पानी में रखा जाता है. इसके बाद इन्हें निकालकर अतिरिक्त पानी सूखने दिया जाता है और फिर इनमें मशरूम स्पॉन मिलाकर छोटे-छोटे बैग तैयार किए जाते हैं. इन बैगों को बंद कमरे में रखने पर लगभग 15 से 20 दिनों में माइसीलियम पूरी तरह फैल जाता है.
केसिंग लेयर के बाद शुरू होता है उत्पादन
जब बैग पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तब उनके ऊपर लगभग डेढ़ इंच मोटी केसिंग मिट्टी की परत बिछाई जाती है. इसके करीब एक सप्ताह बाद मशरूम निकलना शुरू हो जाता है. बैगों को जमीन पर रखकर या रैक सिस्टम के जरिए भी उत्पादन लिया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खेती के दौरान तापमान, नमी और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. संतुलित वातावरण बनाए रखने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं.
कम लागत में बेहतर मुनाफे का विकल्प
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मशरूम की खेती में पारंपरिक फसलों की तुलना में कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत की जरूरत होती है, लेकिन नियमित देखभाल बेहद जरूरी है. बाजार में मिल्की मशरूम की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान वैज्ञानिक विधि अपनाकर, स्वच्छ उत्पादन प्रणाली बनाए रखते हुए और प्रमाणित स्पॉन का उपयोग करके मिल्की मशरूम की खेती करें. इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आय में भी अच्छा इजाफा किया जा सकता है.