महाराष्ट्र सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना के पात्र किसानों को लाभ देने के लिए नियमों में सख्ती बढ़ा दी है. कृषि विभाग ने फसल बीमा योजना के लिए किसान की ओर से दी जाने वाली जानकारी गलत पाए जाने पर कृषि योजनाओं के लाभ से बाहर रखने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा योजना की पात्रता के लिए न्यूनतम जमीन मानक भी तय किया गया है. वहीं, अगर कोई उपज कम उगती है तो उसके लिए भी किसानों को भरपाई की जाएगी. इस बार 14 फसलों को बीमा के अंदर रखने का फैसला किया गया है.
कृषि मंत्री ने 31 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की
महाराष्ट्र सरकार ने प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान पर किसानों को भरपाई करने के लिए पीएम फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम से होने वाले नुकसान से बचने के लिए 31 जुलाई तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं.
उपज घटने पर भी मिलेगा बीमा के तहत मुआवजा
सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार संशोधित बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं, बेमौसम बारिश, सूखे और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण फसल के नुकसान से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है. इसमें कहा गया है कि इस योजना के तहत अगर किसी अधिसूचित राजस्व क्षेत्र में अधिसूचित फसल की औसत पैदावार तय सीमा (थ्रेशोल्ड यील्ड) से कम रहती है, तो किसान बीमा मुआवजे के हकदार होंगे.
14 फसलों का होगा बीमा, कपास के लिए ज्यादा देना होगी किस्त
महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए संशोधित पीएम फसल बीमा योजना में 14 खरीफ फसलों को शामिल किया है. इमें दलहन, तिलहन, मोटे अनाज की फसलों समेत कपास के लिए भी किसान बीमा करा सकेंगे. लिस्ट में धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, उड़द, अरहर, मक्का, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, कपास और प्याज शामिल हैं. महाराष्ट्र कृषि विभाग के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अनाज, दाल और तिलहन उगाने वाले किसानों को बीमा राशि का 2 फीसदी प्रीमियम देना होगा, जबकि कपास और प्याज जैसी कमर्शियल फसलें उगाने वालों को 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा.
आवदेन और जरूरी दस्तावेज
पीएम फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसान नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (NCIP), बैंकों, कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) और ऑनलाइन एप्लीकेशन के जरिए 31 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास एग्रीस्टैक (AgriStack) रजिस्ट्रेशन नंबर, जमीन के रिकॉर्ड, फसल बुवाई का डिक्लेरेशन और आधार से जुड़ा बैंक अकाउंट होना चाहिए, साथ ही उन्हें अनिवार्य डिजिटल फसल सर्वे भी पूरा करना होगा.
ये नियम भी सख्त किए गए
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरण ने कहा कि जलवायु परिवर्तन ने खेती के लिए जोखिम बढ़ा दिए हैं, जिससे किसानों की आय की सुरक्षा के लिए फसल बीमा जरूरी हो गया है. सभी पात्र किसानों को समय सीमा से पहले रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए. मंत्री ने चेतावनी दी कि जो किसान लाभ पाने के लिए गलत जानकारी देंगे, उन्हें पांच साल के लिए कृषि विभाग की योजनाओं से बाहर कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि योजना के लिए पात्र होने के लिए किसानों के पास अधिसूचित फसल के तहत कम से कम 0.10 हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए.