धान की जगह किसान करेंगे खरबूज और J-87 स्प्रिंग मूंगफली की खेती, पानी की होगी बचत

कपूरथला में भूजल संकट को देखते हुए PAU और KVK ने कम पानी वाली फसलों जैसे 'पंजाब अमृत' खरबूज और मूंगफली को बढ़ावा देने की पहल की है. इसका मकसद जल संरक्षण और खेती में विविधता लाना है.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 17 Jun, 2025 | 02:02 PM

पंजाब के कपूरथला जिले में किसान बड़े स्तर पर धान, आलू और स्प्रिंग मक्का जैसी फसलों की खेती करते हैं, जिसमें बहुत ज्यादा पानी  की खपत होती है. इससे यहां का भूजल स्तर तेजी से घट रहा है. इसी समस्या को देखते हुए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कपूरथला ने जिले में कम लागत और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने की पहल शुरू की है. इससे खेती में पानी की बचत और टिकाऊ समाधान की उम्मीद जगी है. खास कर जिले के किसानों को खरबूज और J-87 स्प्रिंग मूंगफली की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

हाल ही में PAU और KVK ने गांव-गांव में फील्ड वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें ‘पंजाब अमृत’ खरबूज और J-87 स्प्रिंग मूंगफली किस्मों को प्रमोट किया गया. इसका मकसद खेती में विविधता लाना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान स्प्रिंग मक्का की जगह खरबूज या मूंगफली लगाएं, तो पानी की खपत काफी हद तक कम हो सकती है.

कभी हजारों हेक्टेयर में होती थी मूंगफली की खेती

कभी कपूरथला में खरबूज और J-87 स्प्रिंग मूंगफली की खेती हजारों हेक्टेयर में होती थी, लेकिन अब इनका रकबा आधे से भी कम रह गया है और मूंगफली की खेती तो लगभग खत्म हो चुकी है. PAU के अनुसार धान, आलू, स्प्रिंग मक्का चक्र में एक हेक्टेयर जमीन पर 26,000 से 27,000 क्यूबिक मीटर पानी सालाना खर्च होता है. वहीं, अगर स्प्रिंग मक्का की जगह खरबूजा या मूंगफली उगाई जाए, तो पानी की खपत आधी से भी कम हो सकती है.

1.15 लाख हेक्टेयर में धान की  खेती

कपूरथला जिले में धान की खेती लगभग 1.15 लाख हेक्टेयर में होती है, जबकि मक्के की खेती 14,500 से 15,500 हेक्टेयर में हो रही है. वहीं, 2014-15 में खरबूज की खेती अपने चरम पर थी, जब यह करीब 2,500 हेक्टेयर (6,000 एकड़) में उगाया जाता था. लेकिन अब इसका रकबा घटकर सिर्फ 900 हेक्टेयर (2,500 एकड़) रह गया है. दूसरी ओर, 1980 के दशक में कपूरथला में मूंगफली की खेती 12,000 हेक्टेयर में होती थी, जो अब सिमटकर केवल 1-2 एकड़ तक रह गई है. कपूरथला में उगाई जाने वाली अन्य सब्जियां जैसे प्याज, लहसुन, टमाटर, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, भिंडी, मिर्च, मटर और बेलवाली/जड़वाली सब्जियां भी बहुत कम क्षेत्र में उगाई जा रही हैं.

भूजल स्तर में तेजी से गिरावट

डॉ. हरिंदर सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर (ट्रेनिंग), KVK कपूरथला ने कहा कि धान, आलू और स्प्रिंग मक्का जैसी पानी ज्यादा लेने वाली फसलों के कारण जिले का भूजल स्तर चिंताजनक रूप से गिरा है. उन्होंने कहा कि दो साल पहले हमने अपने फार्म पर मूंगफली की खेती का प्रयोग किया था, ताकि यह देखा जा सके कि मौजूदा मिट्टी और मौसम में यह फसल कितनी अनुकूल है और हमें सफलता मिली. अब इस साल से हमने लगातार फील्ड विजिट और कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि किसान फिर से इन फसलों की तरफ लौटें.

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Published: 17 Jun, 2025 | 01:59 PM
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