कपास किसानों को 33 फीसदी मिल रही है सब्सिडी, 20 अप्रैल से कर सकते हैं अप्लाई.. जानें क्या है योजना

पंजाब सरकार ने कपास खेती को बढ़ावा देने के लिए 33 फीसदी बीज सब्सिडी की घोषणा की है. राज्य में घटते रकबे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. 1980 के 7 लाख हेक्टेयर से घटकर कपास क्षेत्र 2024 में 1 लाख हेक्टेयर रह गया है. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से कपास का रकबा बढ़ेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 13 Apr, 2026 | 10:37 AM

Punjab Cotton Farming: पंजाब के कपास किसानों के लिए राहत की खबर है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राज्य में कपास की घटते रकबे को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने कपास किसानों को 33 फीसदी सब्सिडी देने का ऐलान किया है. यह सब्सिडी देसी और बीटी कपास की खेती करने वाले किसानों को मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से किसान फिर से कापस की खेती में रूचि लेंगे. इससे फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिलेगा. खास बात यह है कि पंजाब सरकार ने कपास की खेती को फिर से बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया है. क्योंकि राज्य में कपास की खेती पिछले कई सालों में काफी कम हो गई है.

कृषि विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का मकसद किसानों को दोबारा कपास की ओर आकर्षित करना है, जिसे कभी पंजाब का ‘व्हाइट गोल्ड’ कहा जाता था. किसान 20 अप्रैल से 31 मई तक सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन  कर सकते हैं. यह लाभ अधिकतम 5 एकड़ जमीन तक दिया जाएगा और केवल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा मंजूर बीजों पर ही लागू होगा.

पंजाब में कितने एकड़ में होती है कपास की खेती

पंजाब में कपास की खेती 1980 के दशक में 7 लाख हेक्टेयर से घटकर 2024 में करीब 1 लाख हेक्टेयर रह गई है. इसकी वजह गुलाबी सुंडी (pink bollworm) का हमला, MSP से कम दाम और खराब मौसम जैसी समस्याएं रही हैं. हालांकि, सरकारी प्रयासों के बाद 2025 में कपास की खेती का क्षेत्र थोड़ा बढ़कर 1.19 लाख हेक्टेयर हो गया है, लेकिन इस साल का लक्ष्य 1.26 लाख हेक्टेयर रखा गया है.

बीटी कपास पर सब्सिडी मिलनी चाहिए

हाल ही में हुई एक अंतर-राज्यीय बैठक में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कुलपति सतीश सिंह गोसल ने कपास खेती को फिर से बढ़ाने के लिए एक योजना बताई. उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर अच्छे बीज और बीटी कपास पर सब्सिडी मिलनी चाहिए, ताकि ज्यादा किसान इसकी खेती करें. उन्होंने यह भी कहा कि बुवाई से पहले नहरों से पानी की उपलब्धता और संतुलित खाद का इस्तेमाल बहुत जरूरी है, ताकि उत्पादन बढ़ सके.

सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों से ज्यादा नुकसान

हालांकि किसान अभी भी चिंतित हैं. बठिंडा के किसान शरणजीत सिंह  ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि ने कहा कि नुकसान बहुत ज्यादा हो रहा है और कई बार कीटनाशक छिड़कने के बाद भी फसल सुरक्षित नहीं रहती. उन्होंने बताया कि सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों ने पिछले कुछ सीजन में फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है. पंजाब के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने कपास की खेती में गिरावट का कारण धान की ओर बढ़ता रुझान बताया है. उन्होंने कहा कि बेहतर सिंचाई सुविधा और कपास की फसल पर बार-बार कीटों के हमलों के कारण किसान धान की खेती ज्यादा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए समय पर बुवाई, गहरी जुताई और फसल अवशेषों का सही प्रबंधन जरूरी है. साथ ही उन्होंने कहा कि कपास उगाने वाले इलाकों में किसानों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है.

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Published: 13 Apr, 2026 | 09:29 AM
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