गेहूं उठान में देरी, धूप के चलते कम हो रहा उपज का वजन.. क्या करें किसान ?

पंजाब में गेहूं खरीद के बाद उठान और ढुलाई में भारी देरी से संकट गहरा गया है. मंडियों में पड़ा गेहूं गर्मी से खराब हो रहा है. राजनीतिक व ठेकेदार विवाद के चलते केवल 33 फीसदी उठान हुआ है, जिससे कमीशन एजेंटों और किसानों में नाराजगी बढ़ी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Apr, 2026 | 01:35 PM

Wheat Procurement: पंजाब में गेहूं उठान का हाल खासता है. खासकर फरीदकोट जिले में स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है. जिले की मंडियों में खरीदे गए गेहूं की ढुलाई और उठान में देरी एक बड़ी समस्या बन गई है. कमीशन एजेंटों और खाद्य खरीद एजेंसियों के अनुसार, राजनीतिक दखल और ट्रांसपोर्ट व लेबर ठेकेदारों के बीच टकराव के कारण मंडियों से गोदामों तक गेहूं पहुंचाने में बाधा आ रही है. इस देरी की वजह से बड़ी मात्रा में बोरी में रखा गेहूं खुले आसमान और तेज गर्मी में पड़ा है, जिससे उसका वजन कम हो रहा है और गुणवत्ता भी खराब हो रही है. कमीशन एजेंटों का कहना है कि उन्हें बिना गलती के नुकसान की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है, जिससे उनमें नाराजगी है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, खरीद सीजन शुरू हुए 27 दिन बीत जाने के बाद भी केवल लगभग 33 फीसदी खरीदा गया गेहूं ही मंडियों से उठाया जा सका है. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे संबंधित लोगों की चिंता और बढ़ गई है. रविवार शाम तक जिले की मंडियों में कुल 3,93,625 मीट्रिक टन गेहूं की आवक  हुई थी, जिसमें से 3,74,680 मीट्रिक टन की खरीद विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा चुकी थी. हालांकि, खरीदे गए गेहूं में से अब तक केवल 1,33,708 मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है.

गेहूं उठान में आएगी तेजी?

फरीदकोट की डीसी पूनमदीप कौर ने कहा है कि आने वाले दिनों में गेहूं उठान की प्रक्रिया  को तेज किया जाएगा, ताकि और नुकसान और परेशानी से बचा जा सके. हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद संबंधित लोग अभी भी चिंतित हैं और उन्होंने मांग की है कि लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को तुरंत बेहतर किया जाए और समय पर परिवहन सुनिश्चित किया जाए.

कमीशन एजेंटों की क्या है शिकायत

कमीशन एजेंटों का कहना है कि अब तक जो थोड़ी बहुत ढुलाई हुई है, उसका खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ा है. उनका आरोप है कि ठेकेदार देरी और नुकसान को लेकर गंभीर नहीं हैं, जबकि उठान और परिवहन की जिम्मेदारी पूरी तरह से खरीद एजेंसियों  और उनके ठेकेदारों की है. परिवहन लागत आमतौर पर दूरी के आधार पर तय होती है और इसे प्रति 50 किलो बोरी या प्रति क्विंटल के हिसाब से लिया जाता है. 10 किलोमीटर से कम दूरी पर प्रति बोरी 5 से 8 रुपये लगते हैं, जबकि जिले के भीतर ज्यादा दूरी होने पर यह दर 10 से 15 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच जाती है. ये दरें राज्य के आदेश और टेंडर शर्तों के अनुसार तय होती हैं और इसमें लोडिंग, ढुलाई, अनलोडिंग और गोदाम में स्टैकिंग का खर्च शामिल होता है.

पंजाब में गेहूं खरीदी

जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक गुरजीत सिंह ने कहा कि जिले में सबसे ज्यादा गेहूं की खरीद PUNGRAIN ने की है, जो 1,12,385 मीट्रिक टन है. इसके बाद मार्कफेड ने 98,232 मीट्रिक टन, PUNSUP ने 85,604 मीट्रिक टन, पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 66,334 मीट्रिक टन और निजी व्यापारियों ने 12,125 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है.

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Published: 28 Apr, 2026 | 01:23 PM
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