सूरजमुखी की फसल में फूल झुकने का बढ़ा खतरा! समय रहते करें ये उपाय, नहीं तो घट सकता है उत्पादन

बदलते मौसम, तेज गर्मी और बेमौसमी बारिश के कारण सूरजमुखी की फसल में फंगल रोग और कीटों का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर सिंचाई, परागण और रोग नियंत्रण पर ध्यान देने की सलाह दी है. सही देखभाल से फसल सुरक्षित रहेगी और उत्पादन में कमी आने से बचाव किया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 May, 2026 | 08:30 PM

Sunflower Farming: देश के कई हिस्सों में इस समय सूरजमुखी की फसल तेजी से बढ़ रही है और किसानों को अच्छे उत्पादन की उम्मीद है. लेकिन तेज गर्मी, बदलता मौसम और बेमौसमी बारिश किसानों की चिंता भी बढ़ा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी की फसल इस समय बेहद संवेदनशील अवस्था में होती है. इसी दौरान फूल आने और बीज बनने की प्रक्रिया चलती है. अगर किसान थोड़ी भी लापरवाही करें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया, उद्यान विभाग छत्तीसगढ़ के अनुसार, इस समय सूरजमुखी की फसल में फंगल रोग, रस चूसक कीट और तेज हवाओं से नुकसान का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इसलिए किसानों को सिंचाई, परागण और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. सही समय पर किए गए उपाय फसल को सुरक्षित रखने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.

फसल में इस समय बढ़ता है फंगल रोग का खतरा

सूरजमुखी की फसल  में फूल आने के दौरान नमी और मौसम में बदलाव के कारण फंगल रोग तेजी से फैल सकते हैं. यदि लगातार बारिश हो जाए या खेत में पानी जमा हो जाए, तो पौधों में सड़न और फूल झुकने की समस्या बढ़ जाती है. इससे बीज बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन कम हो सकता है. विशेषज्ञ के अनुसार, फंगल संक्रमण होने पर सूरजमुखी का फूल नीचे की ओर लटक सकता है. इससे दानों का विकास ठीक तरह से नहीं हो पाता. ऐसे में किसानों को खेत में जलभराव बिल्कुल नहीं होने देना चाहिए. फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरत पड़ने पर मैनकोजेब, टेबुकोनाजोल, ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन, थायोफनेट मिथाइल और हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि दवाओं का उपयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. इसके अलावा खेतों में हवा का अच्छा प्रवाह बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि पौधों में अधिक नमी न बने.

सिंचाई में लापरवाही पड़ सकती है भारी

मई और जून के दौरान बढ़ते तापमान का असर सूरजमुखी की फसल पर साफ दिखाई देता है. तेज गर्मी में पौधों के सूखने और फूल झड़ने का खतरा  बढ़ जाता है. ऐसे में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया के अनुसार, हल्की मिट्टी वाले खेतों में 8 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. वहीं भारी मिट्टी वाले खेतों में 20 से 25 दिन के अंतराल पर पानी देना पर्याप्त माना जाता है. अगर समय पर सिंचाई न की जाए, तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है और बीज छोटे रह सकते हैं. दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा पानी देने पर फंगल रोग फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए संतुलित सिंचाई सबसे जरूरी मानी जाती है. विशेषज्ञ किसानों को सुबह या शाम के समय सिंचाई करने की सलाह देते हैं, ताकि पानी का सही उपयोग हो सके और पौधों को गर्मी से राहत मिले.

परागण बढ़ाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीका

सूरजमुखी की फसल में अच्छे उत्पादन के लिए परागण बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फूल आने के समय मधुमक्खियां परागण में मदद करती हैं, जिससे बीज बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है. यदि खेतों में मधुमक्खियों की संख्या कम हो, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में किसानों को सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच हाथों से परागण करने की सलाह दी जाती है. इसे हैंड पॉलिनेशन कहा जाता है. इस तरीके से फूलों में पराग सही ढंग से पहुंचता है और दानों का विकास बेहतर होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों के आसपास मधुमक्खियों के अनुकूल वातावरण बनाए रखना भी फायदेमंद होता है. अनावश्यक कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से मधुमक्खियां कम हो सकती हैं, जिससे परागण प्रभावित होता है.

कीट नियंत्रण और पौधों को सहारा देना जरूरी

सूरजमुखी की फसल में लीफ हॉपर, एफिड और जैसिड जैसे कीट भी नुकसान  पहुंचाते हैं. ये कीट पौधों का रस चूसकर उनकी बढ़वार रोक देते हैं और फसल कमजोर हो जाती है. यदि खेत में ऐसे कीट दिखाई दें, तो इमिडाक्लोरोप्रिड या एसिटामिप्रिड जैसे दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है. साथ ही खेतों को खरपतवार मुक्त रखना भी जरूरी है, क्योंकि कई कीट खरपतवारों के जरिए तेजी से फैलते हैं. तेज हवा और बारिश के दौरान सूरजमुखी के पौधे गिरने का खतरा भी बना रहता है. इससे बचाने के लिए पौधों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाना जरूरी माना जाता है. इस प्रक्रिया को अर्थिंग अप कहा जाता है. इससे पौधे मजबूत बने रहते हैं और हवा में गिरने की संभावना कम हो जाती है. विशेषज्ञ का मानना है कि यदि किसान समय रहते इन बातों का ध्यान रखें, तो सूरजमुखी की फसल से बेहतर उत्पादन और अच्छी कमाई हासिल की जा सकती है.

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Published: 13 May, 2026 | 08:30 PM
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