Tips For Farmers: अप्रैल से जून के बीच पड़ने वाली तेज गर्मी को किसान अक्सर परेशानी मानते हैं, लेकिन सच यह है कि यही समय खेती के लिए एक बड़ा अवसर भी लेकर आता है. इस दौरान अगर खेत की गहरी जुताई (करीब 9-12 इंच तक) की जाए, तो मिट्टी अंदर तक पलट जाती है और उसकी बनावट बेहतर हो जाती है. गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीट, रोग और खरपतवार भी काफी हद तक नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि तेज धूप उन्हें खत्म कर देती है.
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगली फसल के लिए जमीन पहले से तैयार हो जाती है और बीजों को अच्छी ग्रोथ के लिए सही माहौल मिलता है. अगर किसान सही समय पर यह जुताई करते हैं, तो उत्पादन में करीब 20-25 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
कीट और रोगों पर नियंत्रण
गहरी जुताई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मिट्टी के अंदर छिपे हानिकारक कीट, उनके अंडे और लार्वा सतह पर आ जाते हैं. तेज धूप के संपर्क में आने से ये नष्ट हो जाते हैं. इससे फसलों में रोगों का खतरा कम होता है और कीटनाशकों की जरूरत भी घटती है. खेतों में उगने वाले जिद्दी खरपतवार अक्सर फसलों की पोषक तत्वों पर कब्जा कर लेते हैं. गहरी जुताई के दौरान इन खरपतवारों की जड़ें बाहर आकर सूख जाती हैं. इससे अगली फसल में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है.
मिट्टी की उर्वरता और जल धारण में सुधार
पुरानी फसलों के अवशेष जब मिट्टी में मिलते हैं, तो वे धीरे-धीरे सड़कर ह्यूमस (Humus) में बदल जाते हैं. यह ह्यूमस मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. गहरी जुताई से यह प्रक्रिया तेज होती है और मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है. गहरी जुताई से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे वर्षा का पानी आसानी से जमीन के अंदर तक पहुंचता है. इससे पानी का संचयन बेहतर होता है और सूखे के समय फसल को नमी मिलती रहती है.
गर्मी की गहरी जुताई (अप्रैल-जून) मिट्टी को 9-12 इंच तक पलटने वाली हल से की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। धूप से हानिकारक कीटों (प्यूपा/अंडे), खरपतवार के बीजों और फंगस को नष्ट करती है। इस प्रक्रिया से मिट्टी का सौरीकरण होता है, जल धारण क्षमता, पैदावार 25% तक वृद्धि होती है pic.twitter.com/QmoWcKF6ca
— Krishi Vibhag Gov UP (@jdabureau) April 17, 2026
मिट्टी में हवा का बेहतर संचार
जब खेत की मिट्टी को पलटा जाता है, तो नीचे की सख्त और दबाई हुई परत ऊपर आ जाती है. इससे मिट्टी में हवा आसानी से अंदर-बाहर हो पाती है, यानी मिट्टी को सांस लेने का मौका मिलता है. हवा के इस बेहतर संचार से मिट्टी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है, जो पौधों की जड़ों के लिए बेहद जरूरी होती है. अधिक ऑक्सीजन मिलने से जड़ें तेजी से फैलती हैं और मजबूत बनती हैं. साथ ही, जड़ें मिट्टी से पानी और जरूरी पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स) भी आसानी से सोख पाती हैं. इसका सीधा असर पौधों की अच्छी ग्रोथ और बेहतर पैदावार पर पड़ता है.
गहरी जुताई के लिए जरूरी सुझाव
- सही उपकरण का चयन: गहरी जुताई के लिए मोल्ड बोर्ड हल (MB Plough) या डिस्क हैरो (Disc Harrow) जैसे उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, जिससे मिट्टी अच्छी तरह पलट सके.
- सही समय: रबी फसल की कटाई के बाद अप्रैल-मई में, जब तापमान 35-45 डिग्री सेल्सियस के बीच हो, तब जुताई करना सबसे फायदेमंद रहता है.
- जुताई की दिशा: अगर खेत ढलान पर है, तो जुताई उत्तर-दक्षिण दिशा में करनी चाहिए. इससे बारिश का पानी खेत में बेहतर तरीके से रुकता है.
कितनी बार करें जुताई?
बेहतर परिणामों के लिए हर 2-3 साल में कम से कम एक बार गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए. गर्मी के मौसम में की गई गहरी जुताई खेती की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है बल्कि आने वाली फसलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करती है. सही समय, सही उपकरण और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं.