Today’s Insights: खर्चा 20 हजार, मुनाफा 2 लाख तक… खीरे से होगी नोटों की बारिश! 60 दिन में बन सकते हैं लखपति
Cucumber Farming Guide: आलू की खुदाई के बाद अगर किसान सही फसल चुन लें, तो घाटे की भरपाई आसानी से हो सकती है. मार्च-अप्रैल में की जाने वाली खीरे की खेती कम लागत और ज्यादा पैदावार वाली नकदी फसल है. सिर्फ 50-60 दिनों में तुड़ाई शुरू हो जाती है और एक एकड़ से 1.5 से 2 लाख रुपये तक की कमाई संभव है. सही बीज, समय पर सिंचाई और थोड़ी समझदारी से खीरा किसानों के लिए मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकता है.
Kheere Ki Kheti: जब आलू की बंपर पैदावार के बाद मंडियों में दाम गिर जाते हैं, तो किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आता है. कई बार लागत तक निकालना मुश्किल हो जाता है और किसान निराश हो जाते हैं. लेकिन खेती में असली समझदारी यही होती है कि एक फसल के नुकसान की भरपाई दूसरी फसल से कर ली जाए. ऐसे में आलू की खुदाई के बाद आने वाला मार्च-अप्रैल का गर्मी भरा मौसम किसानों के लिए एक नया मौका लेकर आता है. इस समय खीरे की खेती किसानों के लिए घाटे को मुनाफे में बदलने का बेहतरीन विकल्प बन सकती है.
क्यों फायदेमंद है खीरे की खेती?
खीरा एक ऐसी नकदी फसल है, जिसकी बाजार में गर्मियों के दौरान मांग तेजी से बढ़ जाती है. जूस की दुकानों, होटल-ढाबों और घरों में खीरे की खपत कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि इस मौसम में इसकी डिमांड 200 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. खीरे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता. बुवाई के 50-60 दिन के भीतर फल आने लगते हैं और किसान तुरंत तुड़ाई कर मंडी में बेच सकते हैं. आलू की तुलना में इसमें बीज, खाद और देखभाल का खर्च भी कम आता है.
खीरे की खेती का सही तरीका
- खेत की तैयारी: आलू की खुदाई के बाद खेत की मिट्टी पहले से ही भुरभुरी हो जाती है. ऐसे में एक-दो बार गहरी जुताई कर खेत को तैयार किया जा सकता है. गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है. खीरे की खेती के लिए बेड बनाकर बुवाई करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
- बीज का चयन: अच्छे मुनाफे के लिए हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल जरूरी है. वीएनआर, सिंजेंटा और नामधारी जैसी कंपनियों के बीज बेहतर पैदावार देने के लिए जाने जाते हैं.
- बुवाई और सिंचाई: मार्च और अप्रैल खीरे की बुवाई के लिए सबसे सही समय है. पौधों के बीच 2 से 3 फीट की दूरी रखें. गर्मी के मौसम में हर 4-5 दिन में हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि पौधों को नमी मिलती रहे.
₹20 हजार लगाकर ₹2 लाख तक की कमाई
अगर एक एकड़ में खीरे की खेती की जाए, तो अनुमानित खर्च 15 से 20 हजार रुपये तक आता है. इसमें बीज, खाद, जुताई, मजदूरी, सिंचाई और कीटनाशक शामिल हैं. सही देखभाल के साथ एक एकड़ में 80 से 100 क्विंटल तक खीरे की पैदावार हो सकती है. अगर बाजार भाव औसतन 20 रुपये प्रति किलो भी रहा, तो कुल आमदनी 1.6 से 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. यानी किसान 1.4 से 1.8 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकता है.
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ज्यादा मुनाफे के लिए जरूरी टिप्स
गर्मियों में मिट्टी की नमी बचाने के लिए मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल करें. इससे खरपतवार नहीं उगते और फल की क्वालिटी बेहतर रहती है. कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल या जैविक कीटनाशकों का छिड़काव करें. खीरे की तुड़ाई समय पर करें, क्योंकि ज्यादा बड़े और बीज वाले खीरे बाजार में कम दाम पर बिकते हैं.
खेती को बनाएं बिजनेस
खेती अब सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक बिजनेस बन चुकी है. आलू के दाम गिरना भले ही किसान के हाथ में न हो, लेकिन अगली फसल से मुनाफा कमाना पूरी तरह उसकी समझ और फैसले पर निर्भर करता है. अगर किसान मार्च-अप्रैल में खीरे की बुवाई करता है, तो मई-जून की गर्मी में वह अच्छा मुनाफा कमा सकता है और घाटे को फायदे में बदल सकता है.