Report: रबी सीजन में मौसम का बड़ा वार, बारिश-ओलों से यूपी, बिहार और पंजाब में गेहूं को भारी नुकसान की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक, तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब के कुछ जिलों में गेहूं की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है. वहीं, पांच राज्यों के करीब 21 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान की बात सामने आई है. सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां करीब 23 जिलों में फसल प्रभावित हुई है.

नई दिल्ली | Published: 27 Mar, 2026 | 11:27 AM

Wheat crop damage: मार्च का महीना आमतौर पर गेहूं की फसल के लिए बेहद अहम होता है. यही वह समय होता है जब फसल पकने लगती है और किसान कटाई की तैयारी करते हैं. लेकिन इस बार मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. देश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

एक निजी एजेंसी एग्रीवॉच की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 11 से 22 मार्च के बीच हुए मौसम के बदलाव ने उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में फसल को प्रभावित किया है. खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला है.

किन राज्यों में कितना नुकसान?

रिपोर्ट के मुताबिक, तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब के कुछ जिलों में गेहूं की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है. वहीं, पांच राज्यों के करीब 21 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान की बात सामने आई है.

सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां करीब 23 जिलों में फसल प्रभावित हुई है. बिजनौर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है, जहां नुकसान 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

पंजाब में भी 14 जिलों में फसल पर असर पड़ा है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान रूपनगर जिले में दर्ज किया गया है. बिहार की बात करें तो यहां 10 जिलों में असर देखा गया है, जिनमें बेगूसराय और सुपौल में ज्यादा नुकसान की आशंका जताई गई है.

फसल गिरने और दाने सिकुड़ने की समस्या

बिजनेसलाइन की खबर के मुताबिक, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण कई जगहों पर फसल खेतों में गिर गई है. जब फसल जमीन पर गिर जाती है, तो उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है और कटाई में भी मुश्किल होती है. इसके अलावा, बारिश से पहले कुछ इलाकों में तापमान अचानक 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे गेहूं के दाने सिकुड़ने लगे. इससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है. हालांकि कुछ किसानों का मानना है कि इस बार बारिश ने तापमान को थोड़ा संतुलित भी किया है, जिससे कुल नुकसान उतना ज्यादा नहीं होगा जितना पहले अनुमान लगाया जा रहा था.

अन्य राज्यों में स्थिति

हरियाणा में भी कई जगहों पर फसल प्रभावित हुई है, लेकिन यहां नुकसान ज्यादा गंभीर नहीं माना जा रहा है. मुख्य रूप से नमी और फसल गिरने की समस्या सामने आई है, जिसे हल्के से मध्यम श्रेणी का नुकसान कहा जा रहा है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. यहां अधिकांश जिलों में नुकसान 5 प्रतिशत से भी कम बताया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि फसल पूरी तरह खराब नहीं हुई है, बल्कि केवल पैदावार और गुणवत्ता पर थोड़ा असर पड़ा है. पश्चिम बंगाल में भी कुछ जगहों पर हल्का नुकसान देखा गया है, लेकिन यह व्यापक नहीं है.

कुल उत्पादन पर कितना असर?

रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही कुछ जिलों में नुकसान ज्यादा हुआ हो, लेकिन देश के कुल गेहूं उत्पादन पर इसका असर सीमित रहेगा. अनुमान है कि पूरे देश में उत्पादन में सिर्फ 1 से 1.5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. जिन राज्यों में ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां भी कुल उत्पादन में गिरावट 2 से 3 प्रतिशत के बीच ही रहने की संभावना है. सरकार ने इस साल करीब 120.21 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है. ऐसे में यह मामूली गिरावट देश के कुल भंडार को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी.

किसानों के सामने चुनौती

हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान सीमित बताया जा रहा है, लेकिन जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई है, उनके लिए यह बड़ा झटका है. उनकी मेहनत और लागत पर सीधा असर पड़ा है. कटाई से ठीक पहले फसल को नुकसान होने से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है.

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