अच्छी बारिश का असर, उड़द बुवाई 8 फीसदी बढ़ी.. एक हफ्ते में 5 लाख हेक्टेयर बढ़ा रकबा

अच्छी बारिश और बेहतर बाजार भाव के कारण इस खरीफ सीजन में उड़द की बुवाई पिछले साल से 8 प्रतिशत बढ़कर 18.67 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में रकबा बढ़ा है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर मानसून के कारण बुवाई घटी है. उत्पादन अब सितंबर-अक्टूबर की बारिश पर निर्भर करेगा.

नोएडा | Published: 25 Jul, 2026 | 09:37 AM

Sowing Black Gram: इस खरीफ सीजन में पहली बार उड़द (काली दाल) की बुवाई पिछले साल के मुकाबले अधिक हो गई है. हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों ने उड़द की बुवाई का रकबा बढ़ाया है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई तक देश में 18.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की बुवाई हो चुकी है. यह पिछले साल इसी अवधि के 17.27 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है.

एक सप्ताह पहले उड़द की बुवाई 13.51 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले साल इसी समय यह 14.36 लाख हेक्टेयर थी. यानी सिर्फ एक सप्ताह में 5 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में नई बुवाई हुई है, जिससे कुल रकबा पिछले साल से आगे निकल गया है. इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मानद सचिव सतीश उपाध्याय ने बिजनेसलाइन को कहा कि पिछले दो सप्ताह में कई राज्यों में बारिश बढ़ने से उड़द की बुवाई  में अच्छी तेजी आई है. उन्होंने बताया कि उड़द के अच्छे बाजार भाव मिलने के कारण किसान इसकी खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं. बीजों की मांग भी बढ़ी है और गुजरात व राजस्थान के कुछ इलाकों में किसान दोबारा उड़द की बुवाई (री-सोइंग) भी कर सकते हैं.

उड़द की बुवाई में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

हालांकि, उन्होंने कहा कि उड़द का अंतिम उत्पादन सितंबर और अक्टूबर में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगा. अगर इस दौरान मौसम अनुकूल रहा तो अच्छी पैदावार की उम्मीद है. राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा उड़द उत्पादक राज्य  है, वहां बुवाई का रकबा 13 प्रतिशत बढ़कर 6.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 5.48 लाख हेक्टेयर था. उत्तर प्रदेश में उड़द की बुवाई में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यहां रकबा 75 प्रतिशत बढ़कर 4.99 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 2.84 लाख हेक्टेयर था.

राजस्थान में उड़द का रकबा 16 प्रतिशत बढ़ा

वहीं, राजस्थान में उड़द का रकबा 16 प्रतिशत बढ़कर 3.25 लाख हेक्टेयर और गुजरात में लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर 0.49 लाख हेक्टेयर हो गया है. दूसरी ओर, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मानसून की देर से शुरुआत और धीमी प्रगति का असर उड़द की बुवाई पर पड़ा है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में उड़द की बुवाई का रकबा 53 प्रतिशत घटकर 1.60 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 3.43 लाख हेक्टेयर था. वहीं, कर्नाटक में भी उड़द की बुवाई करीब 24 प्रतिशत घटकर 0.71 लाख हेक्टेयर रह गई है, जो पिछले साल 0.94 लाख हेक्टेयर थी. कमजोर मॉनसून के कारण इन दोनों राज्यों में किसानों ने उड़द की बुवाई कम की है.

80 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान ने कहा कि उड़द के ऊंचे दाम ने उत्तर भारत के किसानों को इसकी खेती के लिए आकर्षित किया है. उन्होंने बताया कि उड़द 60 से 80 दिन में तैयार होने वाली फसल है और इसे दूसरी फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है. यही वजह है कि इस बार कई किसानों ने उड़द की बुवाई बढ़ाई है. वहीं, दक्षिण भारत के व्यापारियों को उम्मीद है कि मध्य प्रदेश और उत्तर भारत  में बढ़ा उत्पादन महाराष्ट्र और कर्नाटक में आई कमी की भरपाई कर देगा. चेन्नई की फोर पी इंटरनेशनल के बी. कृष्णमूर्ति ने कहा कि कम बारिश के कारण इस साल महाराष्ट्र और कर्नाटक में उड़द का उत्पादन सामान्य का करीब एक-चौथाई ही रहने की उम्मीद है. ऐसे में उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में बढ़ा उत्पादन इस कमी को काफी हद तक पूरा कर देगा.

Topics: