Weather Updates: देश में मानसून की रफ्तार तेज होने से बारिश की कमी घटकर 12 फीसदी रह गई है. इससे किसानों ने राहत की सांस ली है. केंद्र सरकार ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है, जिससे खरीफ फसलों के लिए स्थिति बेहतर हुई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अल नीनो का मतलब हर बार कम बारिश नहीं होता. क्योंकि जुलाई मानसून का सबसे अहम महीना है और पूरे सीजन की 30 फीसदी से ज्यादा बारिश इसी महीने होती है, इसलिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.
दरअसल, खरीफ सीजन की प्रगति और अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बैठक में खरीफ फसलों की स्थिति, मानसून और विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की समीक्षा की गई. साथ ही संबंधित मंत्रालयों और विभागों की तैयारियों का भी जायजा लिया गया.
जुलाई और अगस्त में कैसा रहेगा मौसम
बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों ने जून से 7 जुलाई तक की बारिश की स्थिति की जानकारी दी. आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा था. हालांकि, 7 जुलाई तक हुई अच्छी बारिश के बाद देश में बारिश की कमी घटकर 12 फीसदी रह गई है. सरकार के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई. साथ ही अनुमान है कि जुलाई और अगस्त के दौरान अल नीनो का असर कमजोर से मध्यम रहेगा.
सरकार ने कहा कि अल नीनो होने का मतलब यह नहीं है कि हर बार सामान्य से कम बारिश होगी. क्योंकि जुलाई मानसून का सबसे अहम महीना है और पूरे सीजन की 30 फीसदी से ज्यादा बारिश इसी महीने होती है, इसलिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के लिए सरकार की तैयारियों की जानकारी दी.
कंटीजेंसी योजनाओं को अपडेट किया गया
सरकार ने 262 संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आकस्मिक (कंटीजेंसी) योजनाओं को अपडेट किया है. साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के लिए अल नीनो के जोखिम से निपटने की मानक कार्यप्रणाली (SOP) भी जारी की है. बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले वर्षों में कम बारिश के बावजूद जलवायु अनुकूल फसल किस्मों और नई कृषि तकनीकों की मदद से देश में खाद्यान्न उत्पादन को बनाए रखने में सफलता मिली है.
पशुपालन, पेयजल और जरूरी सामान की उपलब्धता पर भी सरकार की नजर
बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग को देशभर में सूखा चारा, हरा चारा और पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर पर आकलन करने के निर्देश दिए गए. वहीं, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बताया कि सभी जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल हालात सामान्य हैं. हालांकि, संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी और माइक्रो स्तर पर योजना बनाने के निर्देश दिए गए. उपभोक्ता मामले विभाग ने चावल, गेहूं और दालों की खुदरा कीमतों तथा बफर स्टॉक की स्थिति की जानकारी दी. वहीं, उर्वरक विभाग ने बताया कि देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और रबी सीजन के लिए भी पर्याप्त स्टॉक रहने की संभावना है.