क्या है ग्रेपफ्रूट जिसकी खेती करने की सलाह दे रहे हैं कृषि एक्सपर्ट, कई रोगों में करता है दवाई का काम
ग्रेपफ्रूट में शुगर, वसा और प्रोटीन कम मात्रा में होते हैं, जबकि फाइबर और पोटैशियम भरपूर होता है. आधा फल खाने पर करीब 52 कैलोरी, 13.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 8.5 ग्राम शुगर, 0.9 ग्राम प्रोटीन और 38.4 मिलीग्राम विटामिन C मिलता है. ग्रेपफ्रूट में नारिंगिन और हेस्पेरिडिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं.
Grapefruit Farming: ग्रेपफ्रूट एक हाइब्रिड खट्टा फल है, जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. पंजाब की उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु इसकी अच्छी पैदावार में मदद कर रही है. इस फल की खोज 18वीं सदी में बारबाडोस में हुई थी. यह पोषक तत्वों से भरपूर है और सेहत के लिए कई तरह से लाभदायक माना जाता है. बढ़ती बाजार मांग को देखते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विशेषज्ञ किसानों को इसकी खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.
राज्य के लिए सफेद और लाल गूदे वाली कई किस्में सुझाई गई हैं, जैसे डंकन, मार्श सीडलैस, फोस्टर, रेड ब्लश, स्टार रूबी और फ्लेम. बीजरहित किस्में उपभोक्ताओं और व्यापारियों में ज्यादा लोकप्रिय हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, मार्श सीडलैस से एक पेड़ पर लगभग 93 किलो फल मिलता है, जबकि फ्लेम और रेड ब्लश से 74 से 76 किलो तक उत्पादन होता है. अबोहर स्थित पीएयू रिसर्च स्टेशन के वैज्ञानिक अनिल कुमार सांगवान के मुताबिक, स्टार रूबी आकार में थोड़ी छोटी होती है, लेकिन इसका गहरा लाल गूदा और ज्यादा विटामिन C इसे खास बनाता है.
फाइबर और पोटैशियम से भरपूर है ग्रेपफ्रूट
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेपफ्रूट में शुगर, वसा और प्रोटीन कम मात्रा में होते हैं, जबकि फाइबर और पोटैशियम भरपूर होता है. आधा फल खाने पर करीब 52 कैलोरी, 13.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 8.5 ग्राम शुगर, 0.9 ग्राम प्रोटीन और 38.4 मिलीग्राम विटामिन C मिलता है. ग्रेपफ्रूट में नारिंगिन और हेस्पेरिडिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, वजन संतुलित रखने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है. अबोहर स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के रिसर्च स्टेशन के वैज्ञानिक कृष्ण कुमार के अनुसार, इसमें सूजन कम करने और कैंसर-रोधी गुण भी पाए जाते हैं, जिससे इसका औषधीय महत्व बढ़ जाता है.
दवाओं के रूप में भी करता है काम
हालांकि विशेषज्ञ कुछ दवाइयां लेने वाले मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. ग्रेपफ्रूट में फ्यूरानोकोमारिन्स नामक तत्व होता है, जो लीवर के उन एंजाइम्स पर असर डालता है जो दवाओं को तोड़ने का काम करते हैं. इससे दवा का असर जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है. इसलिए जो लोग स्टैटिन या ब्लड प्रेशर की दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें ग्रेपफ्रूट खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रेपफ्रूट की अच्छी खेती के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है.
एक एकड़ में कितने पौधे लगा सकते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार ग्रेपफ्रूट की खेती अच्छी जल-निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी में बेहतर होती है. इसकी जड़ों के सही विकास के लिए जमीन में पानी का स्तर कम से कम तीन मीटर गहरा होना चाहिए. पंजाब की उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु इस फसल के लिए अनुकूल है. किसान इसे बसंत या मॉनसून के बाद टी-बडेड पौधों से लगा सकते हैं. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने 6×6 मीटर की दूरी रखने की सिफारिश की है, जिससे एक एकड़ में लगभग 110 पौधे लगाए जा सकते हैं.
कब करें सिंचाई, छंटाई और खाद का काम
अच्छी और लगातार पैदावार के लिए समय पर सिंचाई, छंटाई और खाद देना जरूरी है. पीएयू दिसंबर में गोबर की खाद डालने और नाइट्रोजन की खुराक फरवरी से अप्रैल के बीच दो हिस्सों में देने की सलाह देता है. साथ ही सिट्रस सायला, लीफ माइनर, थ्रिप्स, फ्रूट फ्लाई जैसे कीटों और सिट्रस कैंकर जैसी बीमारियों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है.