गेहूं से भरी फरीदकोट की अनाज मंडियां, नई आवक को रखने के लिए जगह की कमी.. किसान परेशान

फरीदकोट में गेहूं खरीद की धीमी गति और प्रशासनिक देरी के कारण मंडियां पूरी तरह भर गई हैं. अब मंडियों में जगह न होने की वजह से किसान अपनी फसल सड़क किनारे डालने को मजबूर हो रहे हैं. जिले की गोलवाला मंडी में स्थिति और भी खराब है, जहां जगह कम होने के कारण फसल हाईवे तक फैल गई है. किसानों को अपनी गेहूं की सुरक्षा को लेकर चिंता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 19 Apr, 2026 | 08:27 AM

Punjab Wheat Procurement: फरीदकोट की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद के पीक सीजन के दौरान दो ट्रांसपोर्ट और मजदूर ठेकेदार समूहों के बीच चल रहे विवाद के कारण स्थिति बिगड़ गई है. इस झगड़े की वजह से खरीदे गए गेहूं की ढुलाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है, जिससे मंडियों में भारी मात्रा में अनाज जमा हो गया है. आवक बढ़ने के बावजूद किसानों को अपनी फसल उतारने में काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि मंडियों में जगह कम पड़ रही है. बताया जा रहा है कि यह विवाद दोनों ठेकेदार समूहों के बीच ट्रांसपोर्ट और मजदूरी के काम को लेकर प्रतिस्पर्धा के कारण शुरू हुआ है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि एक ठेकेदार, जो सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता के करीब बताया जाता है, दूसरे समूह के मजदूरों को सरकारी एजेंसी के गोदामों तक जाने वाले ट्रकों में गेहूं लोड करने से रोक रहा है. पिछले साल फरीदकोट मंडियों में ट्रांसपोर्ट, लोडिंग और अनलोडिंग  का पूरा काम एक ही ठेकेदार के पास था. लेकिन इस साल काम को दो हिस्सों में बांट दिया गया है. अब दोआबा क्षेत्र के एक अन्य ठेकेदार को मजदूरी और 8 किलोमीटर के दायरे में गोदामों तक गेहूं पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है.

मजदूरों को धमकाया जा रहा है

ठेकेदार सोहन लाल ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को शिकायत दी है कि उनके मजदूरों को धमकाया जा रहा है और उन्हें गेहूं की ढुलाई का काम करने से रोका जा रहा है. आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) का कहना है कि इस स्थिति ने खरीद प्रक्रिया को बाधित कर दिया है. किसानों को अपनी फसल उतारने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है. एक आढ़ती ने कहा कि अगर जल्द ही ढुलाई शुरू नहीं हुई, तो मंडी व्यवस्था पर दबाव बढ़कर पूरी तरह प्रभावित हो सकती है.

विवाद को जल्द सुलक्षा लिया जाएगा

जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक गुरजीत सिंह ने इस समस्या को स्वीकार किया है और कहा है कि विवाद को सुलझाने और ढुलाई व्यवस्था को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं. स्थिति अभी भी बनी रहने के कारण किसान चिंतित हैं और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी फसल सुरक्षित तरीके से खरीदी जा सके. इस समय मौसम में बदलाव के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं. खुले में पड़ी बड़ी मात्रा में गेहूं को बारिश या खराब मौसम  से नुकसान होने का डर भी बढ़ गया है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है.

मंडियों में जगह न होने से किसान परेशान

वहीं, इससे पहले खबर सामने आई थी कि फरीदकोट में गेहूं खरीद की धीमी गति और प्रशासनिक देरी के कारण मंडियां पूरी तरह भर गई हैं. अब मंडियों में जगह न होने की वजह से किसान अपनी फसल सड़क किनारे डालने को मजबूर हो रहे हैं. जिले की गोलवाला मंडी में स्थिति और भी खराब है, जहां जगह कम होने के कारण फसल हाईवे तक फैल गई है. किसानों को अपनी गेहूं की सुरक्षा को लेकर चिंता है, क्योंकि सड़क किनारे रखी फसल की निगरानी करना मुश्किल है और चोरी का खतरा भी बना रहता है. बताया जा रहा है कि शुरुआत में खरीद धीमी रही, लेकिन बाद में अचानक आवक बढ़ने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया. साथ ही विभिन्न खरीद एजेंसियों के बीच मतभेद और हाल ही में बेमौसम बारिश से फसल को हुए नुकसान ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है.

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Published: 19 Apr, 2026 | 08:26 AM
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