पशुपालन में जैव सुरक्षा अपनाने से बीमारियों का खतरा कम होगा, ऐसे तैयार करें फार्म

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मुताबिक डेयरी फार्म में जैव-सुरक्षा अपनाना बेहद जरूरी है. इससे पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा कम होता है, इलाज का खर्च घटता है और दूध उत्पादन बेहतर होता है. साफ-सफाई, कीटाणुशोधन और सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपने फार्म को सुरक्षित बनाकर लंबे समय तक मुनाफा कमा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 15 Mar, 2026 | 07:37 PM

Dairy Farming: गांवों में अक्सर कहा जाता है कि पशु स्वस्थ तो घर समृद्ध. लेकिन कई बार छोटी-सी लापरवाही से पशुओं में बीमारी फैल जाती है और पूरा फार्म प्रभावित हो जाता है. ऐसे में जैव-सुरक्षा यानी फार्म पर साफ-सफाई, सावधानी और सही प्रबंधन अपनाकर पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, अगर किसान शुरुआत से ही कुछ आसान नियम अपना लें तो बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और दूध उत्पादन भी बेहतर होता है.

क्या है संरचनात्मक जैव-सुरक्षा

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, संरचनात्मक जैव-सुरक्षा का मतलब है कि फार्म की बनावट  और व्यवस्था ऐसी हो जिससे बाहर की बीमारी अंदर न आए और अंदर की बीमारी बाहर न फैले. इसके लिए फार्म के प्रवेश द्वार पर साफ-सफाई का इंतजाम होना चाहिए. बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों को सीधे पशुओं के पास जाने से रोकना चाहिए. फार्म के अंदर अलग-अलग जगहों पर पानी की निकासी, साफ बाड़ा और सूखा फर्श होना चाहिए. बीमार पशुओं को अलग रखने के लिए अलग शेड बनाना भी जरूरी है. इससे बीमारी फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है.

बीमारी का खतरा होता है कम

जब फार्म में जैव-सुरक्षा के नियमों का पालन किया जाता है तो पशुओं में रोग फैलने का खतरा बहुत कम हो जाता है. कई बीमारियां एक पशु  से दूसरे पशु में बहुत तेजी से फैलती हैं, खासकर जब साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता. अगर फार्म में नियमित सफाई, कीटाणुशोधन और सीमित प्रवेश की व्यवस्था हो तो बाहरी संक्रमण अंदर आने से पहले ही रुक जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन फार्मों में जैव-सुरक्षा अपनाई जाती है, वहां पशु ज्यादा स्वस्थ रहते हैं और बीमारी के मामले कम देखने को मिलते हैं.

इलाज का खर्च घटता है

पशुओं की बीमारी का सबसे बड़ा नुकसान इलाज पर होने वाला खर्च है. दवाइयां, डॉक्टर की फीस और उत्पादन  में कमी-इन सबका असर सीधे पशुपालक की जेब पर पड़ता है. अगर शुरुआत में ही जैव-सुरक्षा के नियम अपनाए जाएं तो बीमारी कम होती है और इलाज की जरूरत भी कम पड़ती है. इससे पशुपालकों का खर्च घटता है और कमाई में बढ़ोतरी होती है. सरल शब्दों में कहें तो रोकथाम सस्ती है और इलाज महंगा. इसलिए फार्म पर साफ-सफाई और सुरक्षा के उपाय करना सबसे बेहतर तरीका है.

दूध उत्पादन और फार्म की विश्वसनीयता बढ़ती है

स्वस्थ पशु ही ज्यादा दूध देते हैं. जब पशु बीमार  नहीं पड़ते तो उनका दूध उत्पादन स्थिर रहता है और कई बार बढ़ भी जाता है. इसके अलावा बाजार में भी ऐसे फार्म की पहचान अच्छी बनती है जहां पशु स्वस्थ हों और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो. डेयरी कंपनियां और खरीदार भी ऐसे फार्म से दूध लेना पसंद करते हैं. इससे फार्म की विश्वसनीयता बढ़ती है और पशुपालकों को लंबे समय तक अच्छा मुनाफा मिलता है.

लंबे समय तक लाभकारी पशुपालन संभव

जैव-सुरक्षा अपनाने से पशुपालन लंबे समय तक स्थिर और लाभकारी बन सकता है. जब फार्म में बीमारी कम होती है तो पशुओं की उम्र और उत्पादन क्षमता दोनों बेहतर रहती हैं. इससे पशुपालकों को लगातार आय मिलती रहती है. यही कारण है कि विशेषज्ञ हर पशुपालक को फार्म पर जैव-सुरक्षा के नियम अपनाने की सलाह देते हैं. इसके साथ ही उपचार, टीकाकरण, कीटाणुशोधन और चारा-आहार से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हमेशा पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. सही सलाह और सही प्रबंधन  से पशुपालन को एक सफल और मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है.

Published: 15 Mar, 2026 | 08:56 PM

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