ठंड में मछली पालन कर रहे हैं तो सावधान! पानी की लापरवाही से हो सकता है भारी नुकसान

सर्दी के मौसम में तालाब के पानी की गुणवत्ता मछलियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस बनने से उत्पादन प्रभावित होता है. बिहार सरकार के मत्स्य निदेशालय ने मछली पालकों को सावधानी बरतने और समय पर पानी प्रबंधन की सलाह दी है.

नोएडा | Published: 31 Jan, 2026 | 10:38 AM

Fish Farming : सर्दी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, मछलियों के लिए भी चुनौती लेकर आता है. ठंड बढ़ते ही तालाबों और जलाशयों में पानी की गुणवत्ता बदलने लगती है, जिसका सीधा असर मछलियों की सेहत और उत्पादन पर पड़ता है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय ने मछली पालकों के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग का कहना है कि अगर समय रहते सही प्रबंधन नहीं किया गया, तो मछलियों की मौत, वजन में कमी और आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए सर्दियों में मछली पालन करने वाले किसानों को कुछ जरूरी बातों पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है.

ठंड में क्यों बिगड़ जाती है पानी की गुणवत्ता

बिहार मत्स्य निदेशालय के अनुसार, ठंड के मौसम में तालाब के पानी  में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है. ठंड के कारण पानी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है, जिससे तल में जमा गंदगी से अमोनिया जैसी जहरीली गैसें बनने लगती हैं. ये गैसें मछलियों के लिए बेहद खतरनाक होती हैं और अचानक बीमारी या मौत का कारण बन सकती हैं.

पानी का रंग बताता है तालाब की हालत

सरकार की सलाह है कि मछली पालक  नियमित रूप से तालाब के पानी के रंग पर नजर रखें.

हर 15-20 दिन में पानी बदलना जरूरी

मत्स्य निदेशालय के अनुसार सर्दी के मौसम में तालाब का 10 से 20 प्रतिशत पानी हर 15 से 20 दिन में बदलना बेहद जरूरी है. इससे तालाब में जमा अमोनिया जैसी जहरीली गैसें बाहर निकल जाती हैं और पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है. ऑक्सीजन बढ़ने से मछलियों की सेहत  अच्छी रहती है और उनका विकास भी सही तरीके से होता है. विभाग ने चेतावनी दी है कि एक साथ पूरा पानी बदलना मछलियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हमेशा आंशिक रूप से पानी बदलना ही सुरक्षित और सही तरीका माना जाता है.

ठंड में मछलियों की सेहत ऐसे रखें दुरुस्त

ठंड के मौसम में मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. ऐसे में-

सरकार का कहना है कि साफ पानी और संतुलित चारा  ही सर्दी में मछलियों की सबसे बड़ी दवा है.

लापरवाही पड़ी तो हो सकता है भारी नुकसान

मत्स्य विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ठंड के मौसम में अगर तालाब के पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मछली पालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. पानी में ऑक्सीजन की कमी और अमोनिया जैसी जहरीली गैस बनने से मछलियों की अचानक मौत हो सकती है. इससे न सिर्फ मछली उत्पादन  में तेज गिरावट आती है, बल्कि किसानों की महीनों की मेहनत भी बेकार हो सकती है. विभाग का कहना है कि समय-समय पर पानी की जांच, आंशिक पानी परिवर्तन और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन कर इस नुकसान से बचा जा सकता है.

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