Budget 2026 Expectations: मछली पालकों की सरकार से बड़ी मांग, बजट में भारी सब्सिडी और सस्ते लोन की उम्मीद

बजट 2026-27 को लेकर देश के मछली पालकों और मछुआरों में भारी उत्साह है. इस बार उनकी मुख्य मांगें वित्तीय सहायता, 70 फीसदी तक सब्सिडी और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा बढ़ाने पर टिकी हैं. केंद्र सरकार का लक्ष्य समुद्री खाद्य निर्यात को 1 ट्रिलियन रुपये तक ले जाना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

नोएडा | Published: 19 Jan, 2026 | 03:35 PM

Budget 2026 Expectations : भारत जैसे देश में जहां करोड़ों परिवारों की रसोई और रोजगार पशुपालन व मछली पालन से चलता है, वहां बजट सिर्फ सरकारी आंकड़ों का खेल नहीं होता. यह उन मछुआरों और मछली पालकों की उम्मीदों का पुल होता है, जो सुबह सूरज निकलने से पहले लहरों और तालाबों के बीच अपनी किस्मत तलाशने निकल पड़ते हैं. साल 2025-26 के बजट ने भारत को समुद्री खाद्य बाजार (Seafood Market) का ग्लोबल हब बनाने की नींव तो रख दी है, लेकिन अब नजरें बजट 2026-27 पर टिकी हैं.

पिछली बार सरकार ने मत्स्य पालन के लिए 2,700 करोड़ रुपये का बड़ा फंड दिया था, लेकिन इस बार सवाल यह है कि क्या यह पैसा जमीन पर उन छोटे मछली पालकों तक पहुंच पाएगा जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं? आइए जानते हैं कि इस बार मछुआरों की झोली में क्या आने वाला है और उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं.

पैसे की तंगी होगी दूर? सब्सिडी और आसान लोन की पुकार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मछली पालन  का काम शुरू करना आसान नहीं है. तालाब खुदवाने से लेकर बीज और दाने तक में काफी पैसा लगता है. इस बार मछली पालकों की सबसे बड़ी मांग सब्सिडी को लेकर है. खासकर दलित (SC), आदिवासी (ST) और महिला मछली पालकों की मांग है कि उन्हें परियोजना लागत पर 60-70 फीसदी तक की मदद मिले. इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड  (KCC) को लेकर भी बड़ी उम्मीदें हैं. मछुआरे चाहते हैं कि केसीसी की लोन सीमा जो पहले 3 लाख थी उसे बढ़ाई जाए और बैंक में कागजी कार्यवाही इतनी सरल हो कि एक साधारण मछुआरा भी अपनी जरूरत के लिए तुरंत पैसा ले सके. जब हाथ में पैसा होगा, तभी तो नीली क्रांति को रफ्तार मिलेगी.

अब मोबाइल और सेंसर की मदद से होगा मछली पालन

आज के दौर में केवल पुराने तरीकों से काम नहीं चलेगा. मछली पालकों  की मांग है कि सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक जैसे IoT सेंसर और AI से जोड़ने में मदद करे. सोचिए, अगर किसान को मोबाइल पर ही पता चल जाए कि उसके तालाब के पानी की क्वालिटी कैसी है, तो मछलियों को मरने से बचाया जा सकता है. इसके साथ ही, कोल्ड चेन और स्टोरेज एक बहुत बड़ी जरूरत है. अक्सर मछलियां बाजार पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती हैं, जिससे मेहनत पर पानी फिर जाता है. बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार हर जिले में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स लगवाएगी, ताकि उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

1 ट्रिलियन रुपये के निर्यात का सपना

केंद्र सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2029 तक समुद्री खाद्य निर्यात को 600 अरब रुपये से बढ़ाकर 1 ट्रिलियन रुपये करना है. यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हमारे छोटे मछली पालकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार  से जोड़ा जाएगा. मछुआरों की मांग है कि उन्हें ऐसी ट्रेनिंग दी जाए कि उनका माल विदेशों में भी पसंद किया जाए. गहरे समुद्र (Deep Sea Fishing) में मछली पकड़ने के लिए आधुनिक नावों और सुरक्षा उपकरणों पर जोर दिया जा रहा है. अगर सरकार इस बजट में बड़े जहाजों और सुरक्षित बंदरगाहों के लिए फंड बढ़ाती है, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा मछली निर्यातक देश बन सकता है.

ट्रेनिंग और स्वदेशी नस्लों पर जोर

मछली पालन सिर्फ मछली पकड़ना नहीं, बल्कि एक विज्ञान है. इस बजट में उम्मीद की जा रही है कि कौशल विकास  (Skill Development) के लिए अलग से प्रावधान होगा. मछुआरे वैज्ञानिक तरीके सीखना चाहते हैं ताकि वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ज्यादा उत्पादन कर सकें. एक और अहम मांग है-स्वदेशी मछलियों का संरक्षण. किसान चाहते हैं कि हमारी अपनी लोकल मछलियों की नस्लों पर रिसर्च हो और उन्हें बेहतर बनाया जाए. इससे न केवल मछलियों की क्वालिटी सुधरेगी, बल्कि विदेशी नस्लों पर हमारी निर्भरता भी कम होगी.

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