वेरावल से शुरू हुआ EEZ एक्सेस पास, टूना जैसी महंगी मछलियों तक पहुंचना अब होगा आसान
भारत सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नया एक्सेस पास फ्रेमवर्क लॉन्च किया है. इससे मछुआरों को कानूनी और सुरक्षित तरीके से EEZ क्षेत्र में काम करने का मौका मिलेगा. इस पहल से समुद्री निर्यात बढ़ेगा, मछुआरों की आय मजबूत होगी और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा.
EEZ Fishing: भारत के मछुआरों के लिए आज का दिन खास रहा. 20 फरवरी 2026 को गुजरात के वेरावल में भारत सरकार ने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में मछली पकड़ने के लिए नया एक्सेस पास फ्रेमवर्क लॉन्च किया. इस पहल की शुरुआत केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (Rajeev Ranjan Singh) ने की. केंद्र सरकार के अनुसार, यह पास मछुआरों और संगठनों को भारत के EEZ क्षेत्र में कानूनी, पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से मछली पकड़ने की अनुमति देगा. इससे खासकर टूना और अन्य गहरे समुद्र की महंगी प्रजातियों तक पहुंच आसान होगी.
क्या है EEZ और क्यों है जरूरी?
EEZ यानी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन वह समुद्री इलाका है, जो किसी देश के तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला होता है. यह नियम 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत तय किया गया है. इस क्षेत्र में देश को समुद्री संसाधनों के उपयोग का विशेष अधिकार होता है. भारत का समुद्री तट करीब 11,099 किलोमीटर लंबा है और उसका EEZ क्षेत्र लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है. लेकिन अब तक ज्यादातर मछली पकड़ने की गतिविधि 40 से 50 नॉटिकल मील के अंदर ही सीमित रही है. नए नियमों से अब मछुआरे सुरक्षित और कानूनी तरीके से गहरे समुद्र में जा सकेंगे.
EEZ पास से बढ़ेगी मछुआरों की आय.
नए नियम और बढ़ती कमाई
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 4 नवंबर 2025 को सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ फिशरीज इन द EEZ रूल्स, 2025 को अधिसूचित किया था. ये नियम 1976 के समुद्री क्षेत्र कानून के तहत लागू किए गए हैं. इन नियमों का मकसद है कि मछली पकड़ने का काम जिम्मेदारी से और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत का समुद्री निर्यात 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य और जलीय कृषि उत्पादक देश है. नए एक्सेस पास से निगरानी, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी, जिससे निर्यात और बढ़ने की उम्मीद है.
वेरावल बना लॉन्च का केंद्र
वेरावल पहले से ही बड़ा फिशिंग प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट हब है. इसलिए इसे इस राष्ट्रीय लॉन्च के लिए चुना गया. सरकार देशभर में 34 फिशरीज उत्पादन और प्रोसेसिंग क्लस्टर विकसित करने की योजना बना रही है, जिसमें वेरावल की अहम भूमिका होगी. केंद्र सरकार का कहना है कि यह पहल ब्लू इकोनॉमी विजन के तहत लाई गई है. इसका मकसद है कि समुद्री संसाधनों का सही उपयोग हो, मछुआरों की आमदनी बढ़े और तटीय इलाकों का विकास हो.
यह कदम पारंपरिक मछली पकड़ने से आगे बढ़कर आधुनिक और भविष्य के अनुरूप समुद्री व्यवस्था की ओर बदलाव का संकेत है. इससे छोटे मछुआरों, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा फायदा मिलेगा. अब भारत के मछुआरों के लिए गहरे समुद्र के दरवाजे कानूनी और सुरक्षित तरीके से खुल गए हैं. इससे रोजगार बढ़ेगा, निर्यात मजबूत होगा और देश की समुद्री ताकत और ज्यादा मजबूत बनेगी.