डेयरी फार्मिंग की सफेद सोना है गिर गाय! बस पालने का सही तरीका जान लें, तो साल भर होगी छप्परफाड़ कमाई
डेयरी व्यवसाय को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए देशी गिर गाय का पालन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है. अपनी सहनशीलता और जबरदस्त दूध उत्पादन क्षमता के कारण इसे दूध की रानी कहा जाता है. सही आहार और उचित प्रबंधन अपनाकर पशुपालक कम लागत में अपनी आमदनी को दोगुना कर खुशहाली की नई राह चुन सकते हैं.
Gir Cow Farming : आज के दौर में जब खेती के साथ-साथ आमदनी के नए रास्ते खोजने की बात आती है, तो डेयरी फार्मिंग सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरता है. कई युवा तो अपनी अच्छी-खासी शहर की नौकरियां छोड़कर गांवों में गायों की सेवा और दूध के व्यापार में जुट गए हैं. लेकिन सवाल यह है कि कौन सी गाय पाली जाए जो कम खर्चे में बाल्टी भर-भर कर दूध दे? इसका जवाब है- गिर गाय. गुजरात के गिर जंगलों से निकलकर यह गाय आज पूरे भारत के पशुपालकों की पहली पसंद बन गई है. इसे प्यार से ‘दूध की रानी’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह न केवल ज्यादा दूध देती है, बल्कि इसकी ममता और शांत स्वभाव पशुपालकों का दिल जीत लेता है.
क्यों है यह पशुपालकों की पहली पसंद?
पशुपालक गिर गाय को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसमें बीमारियों से लड़ने की गजब की ताकत होती है. जहाँ विदेशी नस्ल की गायें हल्की सी गर्मी या बीमारी में दम तोड़ देती हैं, वहीं गिर गाय तपती धूप और बदलते मौसम को बड़े आराम से झेल लेती है. साहीवाल और थारपारकर जैसी अन्य देशी नस्लों की तुलना में गिर गाय का दूध उत्पादन काफी स्थिर रहता है. इसके दूध में औषधीय गुण भी अधिक होते हैं, जिसकी वजह से बाजार में इसका दूध और घी ऊंचे दामों पर बिकता है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसान अब इसे तेजी से अपना रहे हैं.
क्या खिलाएं कि बढ़ जाए दूध?
अगर आप चाहते हैं कि आपकी गिर गाय अपनी पूरी क्षमता से दूध दे, तो उसकी थाली यानी आहार पर विशेष ध्यान देना होगा. सिर्फ सूखा चारा खिलाने से काम नहीं चलेगा. गिर गाय को हरा चारा जैसे बरसीम, मक्का के पत्ते और जई बहुत पसंद हैं. इसके साथ ही, दाने का मिश्रण तैयार करते समय इसमें गेहूं, जौ और चना के साथ सरसों या मूंगफली की खली जरूर मिलाएं. एक खास टिप यह है कि इस मिश्रण को गुड़ के पानी में मिलाकर खिलाएं, इससे गाय को तुरंत ऊर्जा मिलती है. पोषण बढ़ाने के लिए आप कभी-कभी गाजर और चुकंदर के टुकड़े भी खिला सकते हैं.
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रहने का इंतजाम और सही देखभाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गिर गाय को बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं होती, लेकिन उसके रहने की जगह साफ और हवादार होनी चाहिए. गुजरात के अमरेली और जूनागढ़ जैसे इलाकों की यह नस्ल अब हरियाणा और राजस्थान की आबोहवा में भी खुद को ढाल चुकी है. बस ध्यान रहे कि गाय को समय पर ताजा पानी मिले और उसके आसपास गंदगी न हो. अगर आप गाय के साथ थोड़ा समय बिताते हैं और उसकी नियमित मालिश करते हैं, तो वह तनावमुक्त रहती है और इसका सीधा सकारात्मक असर उसके दूध उत्पादन पर पड़ता है.
कितनी होगी कमाई? मुनाफे का गणित
गिर गाय पालने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके रख-रखाव की लागत कम है और मुनाफे की गुंजाइश ज्यादा. एक अच्छी गिर गाय दिन भर में 12 से 20 लीटर तक दूध दे सकती है. अगर आप सीधे ग्राहकों को दूध बेचते हैं या इसका घी बनाकर बेचते हैं, तो साल भर में आप आराम से लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए इसके बछड़े और बछिया भी काफी अच्छे दामों पर बिक जाते हैं.