बदलते मौसम में बकरी पालन करने वाले अपनाएं ये 5 आसान उपाय, बीमारी रुकेगी और मिलेगा बड़ा फायदा

बदलते मौसम में बकरी पालन करने वालों के लिए सावधानी बेहद जरूरी है. शेड, खानपान, टीकाकरण और सही देखभाल से बकरियों को बीमारी से बचाया जा सकता है. खासकर छोटे मेमने और गर्भवती बकरियों पर ज्यादा ध्यान देने से नुकसान कम होता है और पशुपालकों को बेहतर फायदा मिल सकता है.

नोएडा | Updated On: 12 Apr, 2026 | 07:18 PM

Goat Rearing: आजकल मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी तेज गर्मी, कभी अचानक बारिश और कभी ठंडी हवा बकरी पालन करने वालों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के डॉ. वाई के सोनी के अनुसार, अगर पशुपालक समय रहते कुछ जरूरी सावधानियां अपनाएं तो बकरियों को बीमारियों से बचाकर नुकसान कम किया जा सकता है. खासकर गर्भवती बकरियां और छोटे मेमने मौसम बदलने से जल्दी बीमार पड़ते हैं, इसलिए उनकी देखभाल और भी जरूरी हो जाती है.

शेड को मौसम के हिसाब से रखें सुरक्षित

डॉ. वाई के सोनी के अनुसार सबसे जरूरी काम बकरियों के शेड  को सही रखना है. बकरियों का बाड़ा जमीन से थोड़ा ऊंचा होना चाहिए, ताकि नीचे नमी जमा न हो और हवा आती-जाती रहे. इससे शेड सूखा रहता है और बीमारी का खतरा कम होता है. छत ऐसी होनी चाहिए जो गर्मी में ज्यादा गर्म न हो और बारिश में पानी अंदर न आने दे. अचानक मौसम खराब होने पर मजबूत पर्दे या तिरपाल से शेड को तुरंत ढक सकें. फर्श पर हमेशा सूखा भूसा, पुआल या दूसरा बिछावन रखें. गीला फर्श निमोनिया, सर्दी और सांस की बीमारी का बड़ा कारण बनता है. खासकर छोटे मेमनों के लिए सूखी जगह बहुत जरूरी होती है.

खानपान में करें थोड़ा बदलाव

बदलते मौसम में बकरियों  की ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो सकती है. इसलिए उनके खाने-पीने में थोड़ा बदलाव करना जरूरी है. तापमान कम होने या बारिश के दिनों में दाना, चारा और संतुलित आहार थोड़ा बढ़ा देना चाहिए. इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और बकरियां अंदर से मजबूत रहती हैं. उन्हें हमेशा साफ और हल्का गुनगुना पानी दें. बहुत ठंडा पानी देने से वे जल्दी बीमार पड़ सकती हैं. डॉ. सोनी के अनुसार आहार में मिनरल मिक्सचर और जरूरी विटामिन जरूर मिलाना चाहिए. इससे बकरियों की इम्यूनिटी मजबूत रहती है और मौसम बदलने का असर कम पड़ता है.

सही नस्ल और समय पर टीकाकरण जरूरी

अच्छे बकरी पालन  के लिए सही नस्ल का चुनाव बहुत जरूरी है. ऐसी नस्लें चुननी चाहिए जो आपके इलाके के मौसम में आसानी से रह सकें. लोकल मौसम में ढलने वाली नस्लें जल्दी बीमार नहीं पड़तीं और उनका पालन भी आसान होता है. डॉ. वाई के सोनी का कहना है कि मौसम बदलने से पहले जरूरी टीकाकरण जरूर करवा लेना चाहिए. इससे बकरियों को निमोनिया, खांसी, बुखार और दूसरी मौसमी बीमारियों से बचाया जा सकता है. अगर समय पर टीके लग जाएं तो इलाज का खर्च भी काफी कम हो जाता है.

मौसम पर नजर रखें, मेमनों का रखें खास ध्यान

बकरी पालन में मौसम की जानकारी रखना  बहुत जरूरी है. अगर बारिश, आंधी या ठंडी हवा की संभावना हो तो पहले ही बकरियों को सुरक्षित शेड में कर दें. छोटे मेमने और गर्भवती बकरियां मौसम बदलने से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, इसलिए इन्हें अलग और सुरक्षित जगह रखें. मेमनों को सूखी जगह, साफ पानी और हल्का पौष्टिक आहार देना चाहिए. अगर किसी बकरी को खांसी, सांस लेने में दिक्कत या सुस्ती दिखे तो तुरंत पशु डॉक्टर से सलाह लें. छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के डॉ. वाई के सोनी के अनुसार, बदलते मौसम में शेड, खानपान, सही नस्ल, टीकाकरण और मौसम की जानकारी पर ध्यान देकर बकरी पालन को सुरक्षित और फायदे का कारोबार बनाया जा सकता है. थोड़ी सी समझदारी से पशुपालक बीमारी का खतरा कम कर अच्छे मुनाफे की तरफ बढ़ सकते हैं.

Published: 12 Apr, 2026 | 10:32 PM

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