Goat Farming: कमाई कराने वाली मशीन से कम नहीं ये बकरी! दूध और मीट से हो रही डबल इनकम
Goat Farming Business: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन तेजी से किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रहा है. कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देने वाली उन्नत नस्ल की बकरियां दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं, जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति लगातार बेहतर हो रही है.
Beetal Goat Farming: गांवों में आजकल बकरी पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कम निवेश, कम जगह और जल्दी मुनाफा मिलने की वजह से किसान इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बीटल नस्ल की बकरियां पालकर किसान दूध और मांस दोनों से अच्छी कमाई कर रहे हैं. यही कारण है कि अब छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे बड़े व्यवसाय का रूप लेता जा रहा है. बकरी पालन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ज्यादा जोखिम नहीं होता और परिवार के सदस्य भी आसानी से इसे संभाल सकते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में यह रोजगार का भरोसेमंद साधन बन रहा है.
हर दिन 3 किलो मिलेगा दूध और 15 हजार कीमत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीटल नस्ल की बकरियां किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही हैं. कुछ नस्लें ऐसी होती हैं जो एक साल में लगभग 40 किलो तक वजन हासिल कर लेती हैं और रोजाना करीब 3 किलो तक दूध दे सकती हैं. इन बकरियों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. व्यापारी खुद गांवों में आकर इन्हें खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को बाजार जाने की परेशानी भी नहीं होती. एक बकरी की कीमत लगभग 15 हजार रुपये तक मिल जाती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है.
एक बकरी पर केवल 300 रुपये मासिक खर्च
बकरी पालन की एक बड़ी खासियत इसका कम खर्च है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक बकरी पर महीने का खर्च लगभग 300 रुपये तक ही आता है. जब बकरी बड़ी हो जाती है, तो खर्च और भी कम हो जाता है. बकरियां हरे चारे, पत्तियों और खेतों में मिलने वाली घास से आसानी से पल जाती हैं. इसी वजह से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह व्यवसाय बहुत आसान हो जाता है. बकरी पालन में जोखिम भी कम होता है और आय के कई स्रोत बन जाते हैं-जैसे दूध, मांस और बच्चों की बिक्री. यही कारण है कि कई किसान इसे स्थायी आय का जरिया बना रहे हैं.
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सालभर में कई बच्चे देने में सक्षम
कुछ उन्नत नस्ल की बकरियों की पहचान उनके लंबे कान और खास तरह के मुंह से आसानी से हो जाती है. इन बकरियों की प्रजनन क्षमता भी अच्छी होती है और एक साल में कई बच्चे दे सकती हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह है कि किसान अब साधारण नस्ल के साथ-साथ उन्नत नस्ल की बकरियां भी पाल रहे हैं. इससे उनकी आय पहले से ज्यादा बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बकरी पालन को सही तरीके से किया जाए, तो यह छोटे किसानों के लिए चलता-फिरता एटीएम साबित हो सकता है. कम खर्च, कम मेहनत और अच्छी मांग-ये तीनों बातें इसे एक सफल ग्रामीण व्यवसाय बनाती हैं. आने वाले समय में बकरी पालन किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.