हरा चारा कहीं पशुओं के लिए जहर तो नहीं बन रहा? दुधारू पशु की डाइट का रखना होगा खयाल

Green Fodder : पशुओं के लिए हरा चारा जितना फायदेमंद है, गलत तरीके से देने पर उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है. ताजा और अत्यधिक नमी वाला चारा पशुओं में दस्त और अफरा जैसी समस्याएं पैदा कर देता है. विशेषज्ञों के अनुसार, चारे को हमेशा थोड़ा सुखाकर और भूसे के साथ मिलाकर ही देना चाहिए ताकि पशु का पाचन तंत्र मजबूत रहे और दूध का उत्पादन न घटे.

नोएडा | Updated On: 10 May, 2026 | 09:26 PM

Green Fodder Feeding Tips : पशुपालन की दुनिया में हरे चारे को अमृत माना जाता है. हर पशुपालक चाहता है कि उसकी गाय-भैंस खूब हरा चारा खाए ताकि बाल्टी दूध से लबालब भर जाए. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही हरा-भरा चारा आपके पशु को बीमार भी कर सकता है? अक्सर किसान अनजाने में ऐसी गलती कर बैठते हैं जिससे पशु को दस्त लग जाते हैं या उसका हाजमा बिगड़ जाता है. गौपालन एक ऐसा व्यवसाय है जहां आपकी एक छोटी सी चूक मुनाफे को घाटे में बदल सकती है. अगर आप भी अपने पशुओं को सेहतमंद देखना चाहते हैं और दूध की धारा बढ़ाना चाहते हैं, तो चारे से जुड़ी ये छोटी मगर मोटी बातें आपके बड़े काम आएंगी.

सीधे खेत से काटकर न खिलाएं हरा चारा

अक्सर किसान सुबह खेत से ताजा चारा  काटते हैं और सीधे पशुओं के आगे डाल देते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की मानें तो यह तरीका बिल्कुल गलत है. ताजे कटे चारे में नमी बहुत ज्यादा होती है, जो पशु के पेट में जाकर अफरा या पतला गोबर (दस्त) जैसी समस्या पैदा कर सकती है. सही तरीका यह है कि चारे को काटकर कम से कम एक दिन के लिए धूप या छाया में थोड़ा सूखने दें. जब उसकी अतिरिक्त नमी निकल जाए, तब उसे कुट्टी काटकर पशुओं को दें. इससे पशु का पेट नहीं फूलता और वह इसे आसानी से पचा लेता है.

नए चारे पर अचानक न लाएं, धीरे-धीरे बदलें डाइट

पशुपालकों के बीच  एक आम चलन है कि जब नया हरा चारा तैयार होता है, तो वे भूसा खिलाना पूरी तरह बंद कर देते हैं और केवल हरे चारे पर निर्भर हो जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चारे में अचानक किया गया यह बदलाव पशु के पाचन तंत्र को हिला देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि नए चारे को हमेशा पुराने सूखे चारे (भूसे) के साथ मिलाकर शुरू करना चाहिए. धीरे-धीरे हरे चारे की मात्रा बढ़ाएं  और सूखे चारे की कम करें. इससे पशु के पेट के बैक्टीरिया नए चारे के साथ तालमेल बिठा लेते हैं और पशु बीमार नहीं पड़ता.

पानी के तालमेल का रखें विशेष ध्यान

जब पशु हरा चारा खाता है, तो उसे चारे के जरिए ही काफी मात्रा में पानी मिल जाता है. ऐसे में पशुपालकों को पानी पिलाने  के समय और मात्रा में सावधानी बरतनी चाहिए. यदि पशु ने भरपूर हरा चारा खाया है, तो उसे तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी न पिलाएं. चारे और पानी के बीच थोड़ा अंतर रखने से पाचन सही रहता है. यह छोटी सी सावधानी पशु को सर्दी-जुकाम और ठंड के असर से भी बचाती है, जो अक्सर गीले चारे और ठंडे पानी के मेल से हो सकता है.

समय और सजगता- गौपालन में सफलता का असली मंत्र

पशुपालन कोई मशीनी काम नहीं है, इसमें ह्यूमन टच यानी जुड़ाव की बहुत जरूरत होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सफल वही है जो अपने पशुओं के साथ समय बिताता है और उनके व्यवहार को समझता है. अगर गाय चारा छोड़  रही है या सुस्त है, तो तुरंत अपने खिलाने के तरीके पर गौर करें. हरा चारा देते समय उसकी सफाई का भी ध्यान रखें. मिट्टी लगा हुआ या सड़ा हुआ चारा कभी न दें. अगर आप चारे के प्रबंधन में थोड़ा अनुशासन और वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए तरीकों को अपनाते हैं, तो आपका डेयरी फार्म हमेशा मुनाफे की गारंटी बना रहेगा.

Published: 10 May, 2026 | 10:25 PM

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