दूध उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा देश भारत, जानें प्रति व्यक्ति रोज कितनी है खपत

भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन दूध केवल कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि पोषण, ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा का आधार है. ब्रांडेड और पैकेज्ड दूध की खपत बढ़ाकर बच्चों और महिलाओं का पोषण सुधारा जा सकता है. वैल्यू-एडेड उत्पाद मुनाफा बढ़ाएंगे, लेकिन दूध ही उद्योग का आधार है.

Kisan India
नोएडा | Published: 8 Mar, 2026 | 10:30 PM

Milk production: भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. इस वित्तीय वर्ष में 2580 लाख टन दूध उत्पादन होने की संभावना है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दूध केवल कृषि उत्पादन है. अगर आप ऐसा सोंच रहे हैं, तो आप गलत हैं. भारत जैसे देश के लिए दूध केवल कृषि उत्पादन नहीं है, बल्कि यह पोषण, ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा का आधार भी है. वहीं, अब दूध उद्योग में अब सवाल उठ रहा है कि क्या भारतीय डेयरी उद्योग बिना उत्पादन बढ़ाए भी बढ़ सकता है?

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट  के मुताबिक, भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता  लगभग 485 ग्राम प्रतिदिन है, जो औसत 230 ग्राम प्रति व्यक्ति खपत से काफी अधिक है. यह अंतर दिखाता है कि दूध की उपलब्धता का मतलब सीधे पोषण नहीं है. खास बात यह है कि देश में दूध का बड़ा हिस्सा गृहस्थी के बाहर इस्तेमाल होता है. जैसे मिठाई, बेकरी, कॉन्फेक्शनरी या निर्यात में. केवल लगभग 45 फीसदी दूध वाणिज्यिक डेयरी अर्थव्यवस्था में जाता है, बाकी उत्पादक परिवारों द्वारा घर में इस्तेमाल या स्थानीय बाजार में बेचा जाता है.

वाणिज्यिक दूध बाजार, जिसकी कीमत लगभग 12 से 13 लाख करोड़ रुपये है, का करीब 60 फीसदी हिस्सा असंगठित और अनब्रांडेड चैनलों से जाता है. यहां दूध में मिलावट एक असामान्य घटना नहीं, बल्कि आम समस्या है. इसमें पानी मिलाना, डिटर्जेंट, स्टार्च, सिंथेटिक फैट, यूरिया और रसायनिक नूट्रलाइजर जैसी चीजें शामिल हैं, जो दूध की मोटाई और वसा सामग्री को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती हैं. ये बच्चों और बुजुर्गों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य का खतरा पैदा करती हैं.

इन खतरों को सीधे खत्म करता है

इसलिए उपभोक्ताओं को पैकेज्ड और ब्रांडेड दूध की ओर लाना, जो FSSAI नियमों और सख्त गुणवत्ता मानकों के तहत आता है. इन खतरों को सीधे खत्म करता है. आज लगभग 60 फीसदी तरल दूध पहले से ही पैकेज्ड और ब्रांडेड है. कुछ संगठित खिलाड़ी इसे सिर्फ वस्तु नहीं बल्कि दैनिक स्वास्थ्य और भरोसे का साथी के रूप में पेश कर रहे हैं.

दूध के संगठित व्यापार की दर शहरों में 90 फीसदी तक

भारत में दूध के संगठित व्यापार की दर शहरों में 90 फीसदी तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 फीसदी तक बदलती है. फिर भी यह किसी भी डेयरी श्रेणी  में सबसे अधिक औपचारिकता दर्शाता है. इसके मुकाबले दही और घी जैसी वैल्यू-एडेड श्रेणियों में संगठित कंपनियों का हिस्सा सिर्फ 20-30 फीसदी है और पनीर में यह 10 फीसदी से भी कम है. इन श्रेणियों को औपचारिक बनाना जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य, किसानों की आय और उद्योग की दीर्घकालीन स्थिरता बनी रहे.

औसत परिवार प्रति व्यक्ति सिर्फ 250 मिलीलीटर दूध प्रतिदिन खरीदता है

दूध की खपत को बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है. औसत परिवार प्रति व्यक्ति सिर्फ 250 मिलीलीटर दूध प्रतिदिन खरीदता है, जिसमें ज्यादातर चाय, कॉफी या दही में इस्तेमाल होता है. ऐसे देश में जहां कैल्शियम, विटामिन D और प्रोटीन की कमी आम है, बच्चों का दूध कम पीना गंभीर चिंता का विषय है. बच्चों के लिए दिन में दो गिलास दूध और महिलाओं में नियमित सेवन, सबसे किफायती पोषण उपायों में शामिल हो सकता है.

दूध का आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है. रोजमर्रा की खपत इसे आदत, भरोसा और ब्रांड स्थिरता बनाने में मदद करती है. ज्यादा उत्पादन होने से प्रति यूनिट लागत कम होती है और वैल्यू-एडेड उत्पादों का समर्थन होता है. पैकेज्ड और पाश्चुरीकृत दूध सुरक्षा और शुद्धता देता है और इसे ढीले दूध से बेहतर मूल्य मिलना चाहिए. वैल्यू-एडेड उत्पाद डेयरी उद्योग में मुनाफा और नवाचार  तय करेंगे, लेकिन दूध ही इसका आधार रहेगा. भारत जैसे युवा, जनसंख्या वाले और पोषण-संकट वाले देश में दूध उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक जरूरत है. सवाल यह नहीं कि डेयरी बिना दूध बढ़ सकती है या नहीं, बल्कि यह है कि सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले दूध के साथ कितनी तेजी से बढ़ सकती है, बिना सुरक्षा, स्थिरता या भरोसे से समझौता किए.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 8 Mar, 2026 | 10:30 PM

लेटेस्ट न्यूज़