Animal Husbandry: दूध चाहिए ज्यादा तो फरवरी में ये काम मत भूलिए, पशुपालकों के लिए जरूरी चेतावनी
फरवरी महीने में ठंड के कारण पशुओं की सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है. पशुपालक कैलेंडर में पशुओं को ठंड से बचाने, साफ-सफाई रखने, सही आहार देने और टीकाकरण से जुड़ी अहम सलाह दी गई है. इन उपायों से पशु स्वस्थ रहेंगे और उत्पादन भी बेहतर होगा.
Cattle Farmers: फरवरी का महीना खत्म होते-होते मौसम थोड़ा बदलने लगता है, लेकिन ठंड पूरी तरह विदा नहीं होती. ऐसे में पशुपालकों को थोड़ी-सी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. सही देखभाल न हो तो पशु बीमार पड़ सकते हैं और नुकसान भी हो सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने फरवरी महीने के लिए पशुपालक कैलेंडर जारी किया है, ताकि किसान भाई अपने पशुओं को स्वस्थ रख सकें.
ठंड से बचाव और रहने की सही व्यवस्था
फरवरी में रातें अभी भी ठंडी होती हैं, इसलिए पशुओं को ठंड से बचाना बहुत जरूरी है. इसके लिए जूट की चादर या कम्बल से पशुओं के शरीर को ढकने का इंतजाम करें. दिन के समय पशुओं को धूप में जरूर बैठाएं, ताकि शरीर गर्म रहे. रात में उन्हें ऐसी जगह रखें, जहां ठंडी हवा न लगे. सोने के लिए पशुओं के नीचे पुआल बिछाएं. इससे ठंड कम लगेगी और पशु आराम से बैठ और सो सकेंगे. ये छोटे-छोटे उपाय पशुओं को सर्दी-जुकाम और दूसरी बीमारियों से बचाने में काफी मददगार होते हैं.
साफ-सफाई और पशुशाला पर दें खास ध्यान
पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए साफ-सफाई सबसे जरूरी है. पशुशाला और कुक्कुट फार्म की नियमित सफाई करें. गंदगी से कई तरह के कीटाणु और बीमारियां फैल सकती हैं. कुक्कुट फार्म में बेडिंग को समय-समय पर धूप दिखाएं, ताकि नमी और कीटाणु खत्म हो सकें. साफ माहौल में पशु और मुर्गियां दोनों स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन भी अच्छा मिलता है.
गर्भवती और नवजात पशुओं की विशेष देखभाल
इस महीने जिन पशुओं के ब्याने का समय है, उनका खास ध्यान रखें. उन्हें ठंड से बचाना बहुत जरूरी है. गर्भवती पशुओं को ऐसा भोजन दें, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स और विटामिन भरपूर हों. इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत अच्छी रहती है. नवजात गाय, भैंस, भेड़ और बकरी को पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवी नाशक दवाएं नियमित रूप से दें. इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं और बच्चे तेजी से स्वस्थ होते हैं.
सिंचाई, टीकाकरण और जरूरी सावधानियां
फरवरी महीने में हरे चारे की फसलों पर भी ध्यान देना जरूरी है. बरसीम की सिंचाई 12 से 14 दिन के अंतराल पर और जई की सिंचाई 18 से 20 दिन के अंतराल पर करें. इससे चारा हरा-भरा रहेगा और पशुओं को अच्छा पोषण मिलेगा. भेड़ और बकरी पालने वाले पशुपालक इस महीने पी.पी.आर. टीकाकरण जरूर कराएं. यह बीमारी काफी खतरनाक होती है और समय पर टीका लगाने से इससे बचाव हो जाता है. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखें, तो देरी न करें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.