Seafood Export India: भारत का समुद्री खाद्य (सीफूड) कारोबार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. वैश्विक बाजार में कई तरह की चुनौतियों के बावजूद देश ने वित्त वर्ष 2025-26 में सीफूड निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाया है. इस दौरान भारत ने 19.72 लाख मीट्रिक टन सीफूड का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 73,890.46 करोड़ रुपये रही. यह अब तक का सबसे अधिक निर्यात माना जा रहा है. भारतीय सीफूड की बढ़ती क्वालिटी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग और निर्यातकों की मजबूत रणनीति ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है.
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बढ़ा कारोबार
पिछले कुछ समय से दुनिया भर में महंगाई, सप्लाई चेन की दिक्कतें और कई देशों की आर्थिक सुस्ती का असर व्यापार पर देखने को मिला. इसके बावजूद भारतीय सीफूड उद्योग ने बेहतर प्रदर्शन किया. यह उपलब्धि बताती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है. इससे देश के निर्यात क्षेत्र को मजबूती मिली है और समुद्री मत्स्य पालन से जुड़े लाखों लोगों को भी फायदा होने की उम्मीद है.
अमेरिका और चीन बने सबसे बड़े खरीदार
भारत से निर्यात होने वाले सीफूड के सबसे बड़े खरीदार अमेरिका और चीन रहे. इन दोनों देशों में भारतीय समुद्री उत्पादों की अच्छी मांग देखने को मिली. अमेरिका लंबे समय से भारतीय झींगा और अन्य समुद्री उत्पादों का प्रमुख आयातक रहा है. वहीं चीन में भी भारतीय सीफूड की खपत लगातार बढ़ रही है. इन दोनों बड़े बाजारों की मजबूत मांग का सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों और मछली पालन से जुड़े किसानों को मिला.
झींगा ने निभाई सबसे बड़ी भूमिका
PIB के अनुसार, भारत के सीफूड निर्यात में सबसे बड़ा योगदान फ्रोजन श्रिम्प (Frozen Shrimp) यानी जमे हुए झींगे का रहा. इस एक उत्पाद से ही देश को 49 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई. कुल सीफूड निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा रही. यानी भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की सफलता में झींगा सबसे बड़ा आधार बना हुआ है. सीफूड निर्यात बढ़ने का सीधा लाभ उन लाखों लोगों को मिलता है, जो मछली पालन, झींगा उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात से जुड़े हैं.
भारत के कई तटीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में किसान और मछुआरे इस कारोबार पर निर्भर हैं. निर्यात बढ़ने से उनकी आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है.
भारत की अर्थव्यवस्था को भी मिला सहारा
कृषि और मत्स्य क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं. सीफूड निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि से देश को विदेशी मुद्रा की अच्छी आमदनी होती है. इससे व्यापार संतुलन मजबूत होता है और निर्यात क्षेत्र को भी नई रफ्तार मिलती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्वालिटी, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग सुविधाओं पर लगातार काम किया जाए, तो आने वाले वर्षों में भारत का सीफूड निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है.